BRICS Summit 2026: डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाले पश्चिम के आगे कितना मजबूत है ब्रिक्स?

BRICS plays a pivotal role in representing the voice of the Global South and developing nations. The BRICS nations account for nearly half of the global population and contribute 40 percent of the world's total GDP. In contrast, the combined GDP of the G7 nations stands at just 28.4 percent, while the rest of the world accounts for only 12.3 percent. Given this context, BRICS serves as a common platform for the world's major emerging markets. Member nations openly criticize Trump's tariff and non-tariff policies, which directly violate World Trade Organization rules. By boosting intra-bloc trade, these countries shield their domestic industries from the impact of sudden shifts in US trade policies. ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों की आवाज बनने में ब्रिक्स बेहद ही अहम है. BRICS राष्ट्रों की आबादी दुनिया की करीब आधी आबादी है. और पूरी दुनिया की GDP का 40 फीसदी हिस्सा ब्रिक्स मुल्कों से आता है. ब्रिक्स के मुकाबले G7 मुल्कों की कुल GDP सिर्फ 28.4 फीसदी है. जबकि दुनिया के बचे बाकी हिस्सा का ये आंकड़ा सिर्फ 12.3 फीसदी है. ऐसी स्थिति में ब्रिक्स दुनिया के उभरते हुए बड़े मार्केट्स के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म है. ब्रिक्स में जो मुल्क हैं वो ट्रंप के टैरिफ और नॉन टैरिफ नीतियों की खुलकर आलोचना करते हैं. जो सीधे तौर पर World Trade Organization के नियमों का उल्लंघन करती हैं. ये मुल्क आपास में कारोबार बढ़ाकर और सदस्य देश अपने घरेलू उद्योगों को अमेरिका की व्यापार नीतियों से होने वाले अचानक बदलाव के असर से बचाते हैं.

ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों की आवाज बनने में ब्रिक्स बेहद ही अहम है. BRICS राष्ट्रों की आबादी दुनिया की करीब आधी आबादी है. और पूरी दुनिया की GDP का 40 फीसदी हिस्सा ब्रिक्स मुल्कों से आता है. ब्रिक्स के मुकाबले G7 मुल्कों की कुल GDP सिर्फ 28.4 फीसदी है. जबकि दुनिया के बचे बाकी हिस्सा का ये आंकड़ा सिर्फ 12.3 फीसदी है. ऐसी स्थिति में ब्रिक्स दुनिया के उभरते

हुए बड़े मार्केट्स के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म है. ब्रिक्स में जो मुल्क हैं वो ट्रंप के टैरिफ और नॉन टैरिफ नीतियों की खुलकर आलोचना करते हैं. जो सीधे तौर पर World Trade Organization के नियमों का उल्लंघन करती हैं. ये मुल्क आपास में कारोबार बढ़ाकर और सदस्य देश अपने घरेलू उद्योगों को अमेरिका की व्यापार नीतियों से होने वाले अचानक बदलाव के असर से बचाते हैं.

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