अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह सीधी और खुली अपील… जिसमें उन्होंने पाकिस्तान समेत दुनिया के बड़े मुस्लिम देशों को ‘अब्राहम समझौते’ यानी Abraham Accords का हिस्सा बनने और इजरायल को मान्यता देने का अल्टीमेटम दे दिया है…इस बेहद संवेदनशील मोड़ पर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रावलपिंडी में बैठे… शक्तिशाली आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के कमरों में सन्नाटा पसरा हुआ है… दोनों इस मुद्दे पर पूरी तरह
से चुप हैं… लेकिन इस रहस्यमयी चुप्पी को तोड़ते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ‘समा टीवी’ पर एक ऐसा बयान दे दिया है… जिसने वाशिंगटन से लेकर यरूशलेम तक हड़कंप मचा दिया है… ख्वाजा आसिफ ने साफ कहा कि… ‘इजरायल को स्वीकार करना पाकिस्तान की बुनियादी विचारधारा के खिलाफ है… हमारी सीधी शर्त है कि जब तक एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना नहीं हो जाती… पाकिस्तान इजरायल के अस्तित्व को कभी मान्यता नहीं देगा…’ प्रथम दृष्टया यह बयान सिर्फ फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता और एक पारंपरिक विदेश नीति जैसा दिखता है… लेकिन अगर आप अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के चश्मे से इसका डीप एनालिसिस करेंगे… तो आपको समझ आएगा कि… पाकिस्तान का यह इनकार जितना सीधा दिखता है… उतना है नहीं… इसके पीछे पांच ऐसे गहरे चक्रव्यूह हैं… जो पाकिस्तान को चाहकर भी ट्रंप के इस समझौते पर दस्तखत करने की इजाजत नहीं देते…
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