Bengal SIR Update: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू होते ही गरीब बस्तियों में हड़कंप मच गया है। कोलकाता के राजाबाजार जैसे इलाकों में BLO घर-घर जाकर 2002 की वोटर लिस्ट से नाम मैच कर रहे हैं। अगर 2002 में नाम है तो कोई दस्तावेज़ नहीं चाहिए, लेकिन नाम नहीं है तो माता-पिता या दादा-दादी का 2002 का रिकॉर्ड माँगा जा रहा है। यहाँ की आबादी में बिहार,
झारखंड, यूपी से आए मज़दूरों की बड़ी तादाद है। ये लोग दशकों से यहीं रह रहे हैं, लेकिन उनके पास पुराने दस्तावेज़ नहीं हैं। एक महिला ने कहा – “मेरे सास-ससुर गुज़र चुके, उनका 2002 का वोटर कार्ड कहाँ से लाऊँ?” बच्चे माँ-बाप से पूछ रहे हैं – “तुमने प्रूफ क्यों नहीं रखे?” लोग डर में हैं कि कागज न दिखा पाने की वजह से उनका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा। कई बिहारी मज़दूर खुद कह रहे हैं – “हमारा नाम बिहार में डाल दो, यहाँ से हटा दो।” BLO मान रहे हैं कि इससे डिलीशन की संख्या लाखों में पहुँच सकती है। गरीब तबका जो रोज़ कमाकर खाता है, उसके लिए 23 साल पुराना दस्तावेज़ ढूँढना नामुमकिन है। लोग कह रहे हैं – “हम तो पैदा हुए तभी से यहीं हैं, लेकिन पेपर पर नहीं। अब कागज के लिए पागल हो रहे हैं।” SIR का मकसद फर्जी वोटर हटाना है, लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है कि असली नागरिक भी डर के साए में जी रहे हैं।
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