West Bengal Elections: SIR ने 90 लाख से ज्यादा Voter हटा दिए, ECI चुप क्यों, क्या है लॉजिकल डिस्क्रेपेन्सी ?

जमीनी स्तर पर जो तस्वीर सामने आती है, वह और भी चिंताजनक है। ऐसे कई मामले हैं जहाँ लोगों के पास सभी वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं, फिर भी उनके नाम हटा दिए गए। एक महिला का नाम इसलिए हट गया क्योंकि उसकी उम्र और उसके पिता की उम्र में अंतर “असामान्य” पाया गया। बाद में सामने आया कि वोटर आईडी में जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई थी। यानी गलती सिस्टम की थी, लेकिन परिणाम नागरिक को भुगतना पड़ा। कई मामलों में सिर्फ इसलिए नाम हटाए गए क्योंकि एक ही पिता से जुड़े लोगों की संख्या अधिक थी। भारत जैसे देश में, जहाँ बड़े परिवार आम हैं, यह मानक खुद ही सवालों के घेरे में आ जाता है। इसी तरह, नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव, शादी के बाद नाम बदलना या दस्तावेज़ों में अंतर होना भी लोगों के बाहर होने का कारण बना।

West bengal SIR : पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले लाखों मतदाताओं के नाम “logical discrepancy” के आधार पर हटा दिए गए। जिन लोगों के पास 2002 की वोटर लिस्ट में नाम, पासपोर्ट और अन्य वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं, वे भी इस प्रक्रिया से बाहर हो गए। यह सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।