केंद्रीय बजट 2026-27 पर विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे विकसित भारत के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नौजवान बेरोजगार और किसान परेशान हैं, तो विकास कैसे होगा? उन्होंने युवा, किसान, गरीब, महिलाओं और कर्जग्रस्त राज्यों (जैसे यूपी के ग्रामीण इलाके, पंजाब, बंगाल) की अनदेखी का आरोप लगाया। बजट को अमीरों/उद्योगपतियों का बताया, जहां ट्रेड टैरिफ प्रभावित सेक्टरों, बेसिक इंफ्रा और डेटा
की विश्वसनीयता पर सवाल हैं। IMF द्वारा भारतीय डेटा को ‘डाउटफुल’ (C कैटेगरी) रखने का जिक्र कर कहा कि सारे आंकड़े संदिग्ध हैं। TMC सांसद कीर्ति आजाद ने भी बजट को जुमलेबाजी बताया, कहा कि पिछले 11 सालों से सरकार सिर्फ झूठ बोल रही है, उम्मीदों पर टिका देश है, लेकिन जमीन पर बदलाव नहीं। बंगाल का जिक्र न होने पर केंद्र पर तंज कसा। वहीं, मांडविया जैसे सत्ताधारी पक्ष ने इसे गरीब-किसान-युवा-महिला लक्ष्य वाला, स्पोर्ट्स इंफ्रा, AI, मैन्युफैक्चरिंग और खेलो इंडिया को बूस्ट देने वाला बताया। कुल मिलाकर, विपक्ष ने इसे निराशाजनक और जनविरोधी करार दिया।
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