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जानते हैं ट्रेन की आखिरी बोगी पर क्यों बना रहता है X का निशान?

जहां एक्स लिखा होता है, वहां नीचे या आजू-बाजू लैंप (बत्ती) भी होता है। लाल रंग की यह बत्ती तकरीबन हर पांच सेकेंड्स में जलती-बुझती है। साथ ही एक अन्य छोटे बोर्ड पर अलग सा चिह्न बना होता है।

ट्रेन के सबसे पीछे बड़ा सा X किसलिए बनाया जाता है?

ट्रेन के पिछले हिस्से पर कभी गौर किया है? सबसे पीछे एकदम सपाट बोगी होती है। उस पर एक खास किस्म का निशान होता है। यह बिल्कुल अंग्रेजी के एक्स (X) अक्षर जैसा दिखता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह क्यों बनाया जाता है। दरअसल, भारतीय रेलवे यह निशान बचाव और सुरक्षा के मकसद से ट्रेन के सबसे पीछे देता है।

क्या है X का अर्थ?: एक्स निशान ही यह स्पष्ट करता है कि कौन सी बोगी ट्रेन के सबसे पीछे होती है। यूं समझें कि यह आखिरी बोगी या हिस्से की निशानी होता है। ऐसे में यह ट्रेन के सबसे पीछे ही दिया जाता है।

कैसा होता है चिह्नः X का चिह्न बोगी के पीछे बीच में होता है। रेलवे इस निशान को बड़े आकार में बनाता है, ताकि दिन में यह दूर से आसानी से दिख जाए। आमतौर पर यह निशान सफेद, पीले और लाल रंग से बनाया जाता है।

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यह होते हैं मकसदः ट्रेन के पीछे इस निशान को देने के कई मकसद होते हैं। सुरक्षा कारणों के चलते रेलवे X को कोड के तहत अपनाता है। इस निशान की मदद से रेलवे के कर्मचारी आसानी से पता लगा लेते हैं कि ट्रेन का आखिरी हिस्सा कौन सा था।

रेलगाड़ी जब भी कि फाटक, हॉल्ट या स्टेशन से गुजरती है, तो कर्मचारी X निशान देखकर समझ जाते हैं कि ट्रेन पूरी आई है या निकली है। ट्रेन के सबसे पीछे यह निशान न होने पर वे गड़बड़ी होने के बारे में समझ जाते हैं।

ट्रेन के पीछे बने एक्स निशान के आसपास लाल रंग का लैंप भी होता है। जानिए क्या होता है इसका काम। (फोटोः टि्वटर)

X न होने पर क्या होगा?: अगर ट्रेन की आखिरी बोगी पर यह निशान न मिले, तो माना जाता है कि ट्रेन के साथ कोई दिक्कत हुई होगी। ऐसा भी हो सकता है कि उस ट्रेन का आखिरी डिब्बा किसी कारणवश छूट गया हो। ऐसे में रेलवेकर्मी सावधान हो जाते हैं और फौरन उचित कार्रवाई करते हैं। नतीजतन यह निशान ट्रेन दुघर्टना या किसी अन्य लापरवाही को अनदेखा होने से बचाता है।

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X के अलावा ये चीजें भी होती हैं: जहां एक्स लिखा होता है, वहां नीचे या आजू-बाजू लैंप (बत्ती) भी होता है। लाल रंग की यह बत्ती तकरीबन हर पांच सेकेंड्स में जलती-बुझती है। ऐसे में यह काफी दूर से ही दिख जाती है और अंधेरे या रात के वक्त भी कारगर साबित होती है। पहले यह तेल से जलती थी, जबकि अब इसे बिजली से संचालित किया जाता है।

बत्ती के साथ ट्रेन के सबसे पीछे एक और चिह्न भी होता है। छोटे से बोर्ड पर LV लिखा रहता है। LV का मतलब- लास्ट व्हीकल होता है। अगर ये नहीं लिखा होता है, तो रेलवेकर्मी समझ जाते हैं कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। ऐसे में अगर आगे आपको भी ये निशान न दिखें, तो समझ जाइएगा कि वह ट्रेन की सबसे आखिरी बोगी नहीं है।

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