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कभी सोचा है, टॉयलेट के फ्लश पर क्यों होते हैं दो बटन?

ड्यूल फ्लश का आइडिया अमेरिका के इंडस्ट्रियलिस्ट डिजाइनर विक्टर पापानेक का था। उन्होंने साल 1976 में अपनी किताब डिजाइन फॉर द रियल वर्ल्ड में इसका जिक्र किया था।

टॉयलेट फ्लश में क्यों होते हैं 2 बटन, जानें इस लेख में। (image source-Facebook)

वक्त के साथ तकनीक ने खूब तरक्की की है। विभिन्न चीजों के डिजाइन्स में भी तकनीक का यह बदलाव साफ दिखाई देता है। बीते कुछ समय से टॉयलेट के फ्लश में 2 बटन का चलन भी काफी देखा जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टॉयलेट फ्लश में ये 2 बटन क्यों होते हैं और जब दोनों ही बटन से पानी फ्लश होता है तो फिर ये 2 क्यों हैं? इसका जवाब हम आपको बताएंगे। दरअसल 2 बटन वाले टॉयलेट फ्लश या कहें कि ड्यूल फ्लश टॉयलेट का कॉन्सेप्ट दो अलग-अलग बटनों से है, जिनमें से एक छोटा और एक बड़ा होता है। इन दोनों ही बटनों का अलग-अलग एक्जिट वॉल्व होता है और पानी का लेवल भी दोनों का अलग-अलग होता है।

जल संरक्षण है उद्देश्यः दरअसल इन दोनों बटनों में से छोटे वाले बटन में 3-4.5 लीटर पानी रिलीज होता है और बड़े वाले बटन से बटन से करीब 6-9 लीटर पानी रिलीज होता है। जिससे साफ है कि छोटा वाला बटन लिक्विड वेस्ट को फ्लश करने में और बड़ा वाला बटन सॉलिड वेस्ट को फ्लश करने में इस्तेमाल होगा। इस तरह अगर आप टॉयलेट में यूरिन पास करने जाएं तो छोटे वाले बटन का इस्तेमाल करें। इनकी मदद से एक बटन वाले टॉयलेट फ्लश की अपेक्षा पानी की काफी बचत होती है। एक अनुमान के मुताबिक इस तरह आप एक साल में करीब 20 हजार लीटर पानी की बचत कर सकते हैं। इससे जहां पानी की बचत होती है, वहीं पानी का बिल भी कम किया जा सकता है।

बता दें कि ड्यूल फ्लश का आइडिया अमेरिका के इंडस्ट्रियलिस्ट डिजाइनर विक्टर पापानेक का था। उन्होंने साल 1976 में अपनी किताब डिजाइन फॉर द रियल वर्ल्ड में इसका जिक्र किया था। इसके बाद साल 1980 में इसे लागू करने वाला ऑस्ट्रेलिया पहला देश बना था और उसके बाद धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में काफी पसंद किया गया और इसे लगभग हर जगह लागू करने की कोशिश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में पानी की कमी हो रही है, जिस कारण पानी बचाने की इस तरह के अभी कई और प्रयास करने की जरुरत है। भारत की बात करें तो यहां 54 प्रतिशत भूजल खतरनाक स्तर से कम हो रहा है और दुख की बात है कि हम अभी तक भी जल संरक्षण के मामले में बहुत पीछे हैं।

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