LIC IPO क्यों है इतना खास, जानें भारत के सबसे बड़े आईपीओ के बारे में ताजा जानकारी

सरकार ने एलआईसी आईपीओ के जरिए 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। अब यह भी ताजा जानकारी सामने आई है कि अगले महीने यानी नवंबर में एलआईसी आईपीओ पेश करने के लिए सेबी के पास अगले महीने में दस्‍तावेज जमा कराएगी।

LIC IPO क्यों है इतना खास, जानें भारत के सबसे बड़े आईपीओ के बारे में ताजा जानकारी (File Photo)

आईपीओ संपत्ति बेचकर 1.75 ट्रिलियन रुपये (24 अरब डॉलर) जुटाने की सरकार की योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है। धन का उपयोग भारत के बजट घाटे को कम करने के लिए किया जाएगा, जो इस वर्ष 6.8% रहने का अनुमान है। सरकार की योजना में चार अन्य राज्य द्वारा संचालित फर्मों – एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम कॉर्प, शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया और कंटेनर कॉर्प ऑफ इंडिया में बहुमत हिस्सेदारी की पेशकश शामिल है। इसी तरह एलआईसी की आईपीओ को की भी हिस्‍सेदारी बेची जाएगी। यह सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

और अब स्टॉक मार्केट इंडस्ट्री का ध्यान देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाली सार्वजनिक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के आईपीओ पर लगी हुई हैं। जानकारी के मुताबिक, सरकार ने एलआईसी आईपीओ के जरिए 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। अब यह भी ताजा जानकारी सामने आई है कि अगले महीने यानी नवंबर में एलआईसी आईपीओ पेश करने के लिए सेबी के पास अगले महीने में दस्‍तावेज जमा कराएगी।

ईपीओ क्‍यों है खास
भारतीय जीवन बीमा निगम एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सर्वव्यापी है। एलआईसी लगभग 300 मिलियन नीतियों और 1.2 मिलियन से अधिक एजेंटों, 100,000 कर्मचारियों, 2,000 शाखाओं और 1,500 उपग्रह कार्यालयों के साथ भारतीय बाजार के दो-तिहाई हिस्से को नियंत्रित करता है। प्रशासन एलआईसी में 5% से 10% की हिस्सेदारी बेचने के लिए प्रयास कर रहा है, जो भारत की सबसे बड़ी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश होगी। 10% हिस्सेदारी वैश्विक बीमा उद्योग में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

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कब आएगा आईपीओ
सरकार 2022 के पहले तीन महीनों में कुछ समय के लिए लक्ष्य कर रही है। आईपीओ की शुरुआत 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए की गई थी, लेकिन इसमें देरी हुई क्योंकि महामारी के दौरान भारत के कठोर नियमों ने आईपीओ के काम की गति को बाधित कर दिया। .

एलआईसी की कीमत क्या हो सकती है?
सरकार 8 ट्रिलियन से 10 ट्रिलियन रुपये (135 बिलियन डॉलर) के मूल्यांकन की मांग कर रही है। उस स्तर पर, 5% हिस्सेदारी की बिक्री भी इसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बना देगी और 10% कमजोर पड़ने से यह दुनिया में कहीं भी बीमाकर्ता को शामिल करने वाला दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। जेफरीज इंडिया के विश्लेषकों ने कहा है कि एलआईसी का मूल्यांकन 19 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। आरबीएसए सलाहकारों के एक सहित अन्य अनुमानों ने मूल्य को 10 ट्रिलियन से 11.6 ट्रिलियन रुपये के दायरे में रखा है।

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सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी
दरअसल सरकार ने अपनी विभिन्न सम्पत्तियों में 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का टारगेट तय किया हुआ है। एलआईसी का आईपीओ भी उसी विनिवेश का ही एक हिस्सा है और एलआईसी में विनिवेश के बिना इस टारगेट को पूरा नहीं किया जा सकता है। इस कारण सरकार इसके हिस्‍सेदारी को बेचना चाहती है।

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