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क्‍या होता है Ethanol Blended Petrol, वाहनों लिए है कितना फायदेमंद और कितना नुकसानदायक, जानें

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अप्रैल 2023 से पहले देश के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध हो सकता है।

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भारत दुनिया में इथेनॉल का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। (Express photo by Nirmal Harindran)

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत ईंधन के नए विकल्पों की तलाश में जुटा है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा, हम पुणे में 100 प्रतिशत इथेनॉल पर स्कूटर-ऑटो शुरू करने के लिए बजाज से बात करेंगे। हाल में भारत सरकार ने भी इथेनॉल को लेकर एक डेटा जारी किया, जिसमें बताया गया है, ‘देश ने तय समय से 5 महीने पहले 10 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है।’ ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल क्या है और वाहनों लिए यह कितना फायदेमंद और कितना नुकसानदायक है।

क्या है इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल?

जैविक यौगिक इथाइल एल्कोहल इथेनॉल कहलाता है। इसका इस्तेमाल शराब जैसे पेय पदार्थों में भी होता है। ईंधन के तौर पर सिर्फ इथेनॉल का इस्तेमाल भी वाहनों में किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए वाहनों के कलपुर्जों में बदलाव करना होगा। यही वजह है कि फिलहाल इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाकर वाहनों में इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआत एक या दो प्रतिशत से हुई थी लेकिन अब पेट्रोल में 5 से 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि अप्रैल 2023 से पहले देश के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध हो सकता है।

वाहनों पर क्या होगा असर?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों पर कोई बुरा असर देखने को नहीं मिला है। इथेनॉल में ऑक्सीजन होता है, जिससे ईंधन को पूरी तरह जलने में मदद मिलता है। यही वजह है कि ईथेनॉल को पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर ईंधन माना जा रहा है। भारत सरकार के आधिकारिक बयान से पता चलता है कि भारत दुनिया में इथेनॉल का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे नंबर पर ब्राजील, तीसरे नंबर पर यूरोपीय संघ और चौथे नंबर पर चीन आता है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को पांच महीने पहले हासिल करने से भारत सरकार ने 41,500 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा का बचत कर लिया है। साथ ही इससे ग्रीनहाउस उत्सर्जन में भी 27 लाख टन की कमी आयी है।

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