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हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में ये चीजें नहीं होतीं कवर, जानें शर्तें

जानकारी के अभाव में या पॉलिसी के कठिन साहित्य को न समझ पाने से लोग भ्रम में रहते हैं। ऐसे में कई बार वे उन चीजों के लिए क्लेम पाने को आवेदन करते हैं, जो कवरेज में आती ही नहीं हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में हर बीमारी कवर नहीं होती है। कंपनियां अपने-अपने हिसाब से पॉलिसी में क्लेम होने वाली चीजें तय करती हैं। जानकारी के अभाव में या पॉलिसी के कठिन साहित्य को न समझ पाने से लोग भ्रम में रहते हैं। ऐसे में कई बार वे उन चीजों के लिए क्लेम पाने को आवेदन करते हैं, जो कवरेज में आती ही नहीं हैं। चलिए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं, जो हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में कवर नहीं होतीं-

राइडर के तौर पर कई जटिल बीमारियों के इलाज पर क्लेम मिल जाता है। मगर कुछ छोटी-मोटी या घरेलू वजहों से हुई बीमारियां कवरेज में नहीं आतीं। अगर आपकी पॉलिसी में रोबोटिक सर्जरी या सायबर नाइफ का जिक्र नहीं है, तो उसका क्लेम नहीं मिलेगा।

स्टेम सेल थेरेपी भी इसके कवरेज में नहीं आती। ऐसे में पता कर लें कि आखिर डॉक्टर की सलाह वाला इलाज कवरेज में आता है भी नहीं। मसलन अधिक शराब या सिगरेट की लत से होने वाली बीमारी पर ज्यादातर क्लेम नहीं मिलता।

मानसिक बीमारी, सुनने वाले यंत्र, कॉन्टैक्ट लेंस से जुड़े खर्चे, चलने-फिरने में सहायता करने वाले यंत्र (वॉकर्स), लॉन्ड्री चार्ज, डाइपर, टॉयलट संबंधी चीजें और बच्चों के खाने पर क्लेम नहीं मिलता।

इलाज के बिल में अस्पताल वॉर्ड-कमरे का किराया व वहां के डॉक्टर का बिल अलग-अलग दिखाए तो उसका भुगतान भी क्लेम में नहीं होगा।

त्वचा और दांत संबंधी समस्याओं को लेकर क्लेम भरा है, तो वह रिजेक्ट होगा। ब्यूटी मेकओवर और विशेष मामलों में प्लास्टिक सर्जरी भी कवर नहीं होती है।

अस्थमा जैसी बीमारी में भी कवर नहीं मिलता। भले ही मरीज घर इलाज की शर्त पूरी करे। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन चार्ज भी हेल्थ कवर के तहत नहीं आता। एडमिशन डिपॉजिट के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कुछ एचआईवी और जन्मजात बाहरी रोग जैसी समस्याएं भी हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं होतीं। यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस के मुखिया विकास माथुर कहते हैं कि डायबिटीज मेल्लिटस और हायपरटेंशन जैसी स्थितियां अगर पॉलिसी में शामिल हैं, तो ये तीन-चार साल बाद कवर हो सकती हैं, जबकि कुछ गिनी चुनी सर्जरी का क्लेम एक से दो साल के बाद मिलता है।

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