सरकारी Gold Bonds में 25-29 अक्टूबर के बीच किया जा सकेगा निवेश, ऑनलाइन आवेदन पर मिलेगी छूट

बांड भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किए जाएंगे। इसके लिए सोने का भाव सदस्यता अवधि से पहले के सप्ताह के अंतिम तीन कार्य दिवसों के लिए भारतीय सर्राफा एवं आभूषण संघ लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के औसत के बराबर होगा।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकारी स्वर्ण बांड 2021-22 की अगली किस्त में 25 अक्टूबर से पांच दिनों के लिए निवेश किया जा सकता है। स्वर्ण बांड की 2021-22 श्रृंखला के तहत अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 के बीच चार चरणों में बांड जारी किए जाएंगे। इस श्रृंखला के तहत मई 2021 से सितंबर 2021 तक छह चरण में बांड जारी किए गए हैं।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2021-22 सीरीज-8 की सदस्यता अवधि 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर होगी और बांड दो नवंबर को जारी किए जाएंगे। ये बांड बैंकों (छोटे वित्त बैंकों और भुगतान बैंकों को छोड़कर), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएस), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त शेयर बाजारों (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया और और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के माध्यम से बेचे जाएंगे।

बांड भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किए जाएंगे। इसके लिए सोने का भाव सदस्यता अवधि से पहले के सप्ताह के अंतिम तीन कार्य दिवसों के लिए भारतीय सर्राफा एवं आभूषण संघ लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के औसत के बराबर होगा।
बांड की अवधि आठ वर्ष के लिए होगी और पांचवें वर्ष के बाद बाहर निकलने का विकल्प भी होगा।

मंत्रालय ने कहा कि निवेशकों को ऑनलाइन आवेदन तथा डिजिटल तरीके से भुगतान करने पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट दी जाएगी और इस योजना में निवेश करने पर ब्याज के रूप में अतिरिक्त प्रतिफल भी मिलेगा। योजना में न्यूनतम एक ग्राम सोने का निवेश किया जा सकता है।

क्या होते हैं Sovereign Gold Bonds?: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (भौतिक सोना रखने का विकल्प) सरकारी प्रतिभूतियां हैं, जो सोने के ग्राम में अंकित हैं और सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाती हैं। निवेशकों को इनके लिए निर्गम मूल्य नकद में देना होता है और बांड मैच्योरिटी पर नकद में भुना लिए जाते हैं। हालांकि, अगर सोने के बाजार भाव में गिरावट आती है तो पूंजी हानि का खतरा हो सकता है। पर आप सोने की उन इकाइयों के मामले में नहीं हारेंगे जिनके लिए आपने भुगतान किया था।

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