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Reliance Jio Fiber कनेक्शन आपको मिलेगा कि नहीं? इन बातों पर करता है निर्भर

Reliance Jio Fiber Connection: मौजूदा समय में अगर आप कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं तो पहले आपको कंपनी की वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करना होगा। बता दें कि यह जरूरी नहीं है कि रजिस्टर करने के बाद आपके यहां कनेक्शन की सुविधा मिल ही जाए।

(फाइल फोटो)- REUTERS)

Reliance Jio Fiber Connection: रिलायंस जियो ने गुरूवार को फाइबर टू होम (FTTH) सर्विस के कमर्शियल इस्तेमाल की घोषणा कर दी। जियो फाइबर ब्रॉडबैंड सर्विस के प्लान्स 100Mbps की स्पीड के साथ 699 रुपए के दर से शुरू हैं। जियो के फाइबर ब्रॉडबैंड की सर्विस के लिए रजिस्ट्रेशन अगस्त के अंत से शुरू हो गए थे। इस सर्विस के कनेक्शन के लिए पहले ही 1.5 करोड़ आवेदन आ चुके हैं। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य है कि देश के 1600 इलाकों में 2 करोड़ घरेलू और 1.5 करोड़ बिजनेस कनेक्शन मुहैया कराने में सफल हो पाए। हालांकि सभी आवेदकों को जिया रिलायंस फाइबर की सर्विस नहीं मिल पाएगी। कंपनी का कहना है कि Jio Fiber रोल-आउट चरणबद्ध तरीके से होगा और इसकी रीच डिमांड पर निर्भर करेगी।

मौजूदा समय में अगर आप कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं तो पहले आपको कंपनी की वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करना होगा। यहां आप निजी कनेक्शन के लिए भी और अपनी सोसाइटी के लिए भी रजिस्टर कर सकते हैं। बता दें कि यह जरूरी नहीं है कि रजिस्टर करने के बाद आपके यहां कनेक्शन की सुविधा मिल ही जाए। इसके लिए कुछ बातें हैं जिनपर यह निर्भर करेगा कि आपको या आपके इलाके में यह कनेक्शन मिलेगा या नहीं।

फाइबर ऑप्टिक केबल: यह मोबाइल कनेक्शन की तरह नहीं है कि आपके इलाके में एक नेटवर्क टावर लगने से ही फोन चलने लगे। जियो फाइबर FTTH यानी फाइबर टू होम सर्विस है जिसके लिए हर घर में केबल पहुंचना जरूरी है। फाइबर ऑप्टिक केबल के लिए रोड और अन्य जगहों की खुदाई कर केबल बिछाने की प्रक्रिया है। इस काम के लिए मौसम का भी सही होना जरूरी है। फिलहाल जियो फाइबर सर्विस वहीं उपलब्ध होगी जहां फाइबर ऑप्टिक केबल पड़ चुकी हैं। अगर आपके यहां से पर्याप्त मात्रा में इसकी मांग नहीं है तो कंपनी का कहना है कि जहां ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क नहीं होगा वहां कंपनी यह सर्विस प्रदान नहीं करेगी।

सरकार ने 2016 में भारत में ऑप्टिकल फाइबर में तेजी लाने के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) नियमों की शुरुआत की थी। हालांकि, देश के अधिकांश राज्यों ने व्यावहारिक रूप से RoW को लागू नहीं किया है और कंपनियों को अभी भी स्थानीय निकायों से मंजूरी प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

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