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इन 4 बातों से कम हो जाता है सीएनजी गाड़ियों में आग लगने का खतरा

गाड़ियों में ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल का विचार सबसे पहले 1930 में आया था। बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर इसे बाद में जरूरी भी हो गया। ढेरों रिसर्च के बाद इसे सीएनजी के तौर पर गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाने लगा। यूरोपीय देशों से इसकी शुरुआत हुई थी।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः ड्रीम्सटाइम)

भारत में इन दिनों अधिकतर लोग सीएनजी (कमप्रेस्ड नैचुरल गैस) गाड़ियां लेना पसंद करते हैं। कारण- सीएनजी से होने वाले ढेर सारे फायदे हैं। मसलन पेट्रोल-डीजल की तुलना में यह पैसों की बचत कराता है। साथ ही प्रदूषण भी कम फैलाता है। लेकिन इससे कुछ नुकसान भी होते हैं। मसलन गाड़ियों का एक्जॉस्ट वॉल्व जल्दी खराब होना। पेट्रोल इंजन को सीएनजी में तब्दील कराने पर अधिक खर्च आना। सीएनजी के सिलेंडर बड़े व भारी होना और आग लगने का खतरा होना।

गाड़ी में आग लगने की अधिकतर घटनाएं चिंगारी, शॉर्ट सर्किट या गैस लीकेज के कारण होती हैं। पर थोड़ी सी सावधानी और समझारी बरत कर आप इस खतरे को कम कर सकते हैं। मगर ये जानने से पहले आपको बताते हैं कि किन वजहों से आखिर सीएनजी में आग लगने का खतरा अधिक रहता है

गाड़ी का रख-रखाव न करना। समय-समय पर गाड़ी का चेकअप भी न कराना। चूंकि गाड़ी के कई तार चलते-चलते घिस जाते हैं और पुराने हो जाते हैं। ऐसे में उनमें शॉर्ट सर्किट होने का खतरा रहता है।

गाड़ी के मालिक या उसमें बैठने वाले भी कई बार हादसों को न्योता देते हैं। मसलन  गाड़ी के अंदर बैठकर सिगरेट पीना या पटाखे जैसे ज्वलनशील सामान रखना। अधिक समय तक हीटर चलाना भी किसी के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है।

अक्सर लोग पैसे बचाने के चक्कर में पेट्रोल-डीजल कार में सीएनजी किट लगवा लेते हैं। वे कई बार यह काम सड़क किनारे छोटे-मोटे मकैनिकों या डीलरों से करा लेते हैं। सही से फिटिंग और किट इंस्टालेशन न हो पाने से लीकेज की आशंका रहती है, जिससे आग भी लग सकती है।

ओवर फ्यूलिंग और पुर्जे सही से फिट न हो पाने के कारण भी सीएनजी गैस लीक हो सकती है। वहीं, सड़क हादसे के बाद भी गाड़ी में आग लगने की आशंका रहती है।

ये हैं 4 उपाय, जिनसे आप कार में आग के खतरे को कम कर सकते हैं

– किसी भी हालत में तय सीमा (200) के प्रेशर से अधिक सीएनजी गैस न भराएं।

– छोटे-मोटे मकैनिक या डीलर के यहां सीएनजी किट या सिलेंडर न फिट कराएं।

– केवल कंपनी के और विश्वसनीय ब्रांड के सिलेंडर को प्राथमिकता दें, जो कि जरूरी मानकों पर खरे उतरते हों।

– पेट्रोल-डीजल गाड़ी को अगर सीएनजी में तब्दील करा रहे हों, तो सिलेंडर टेस्ट सर्टिफिकेट जरूर हासिल करें।

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