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चेक ट्रंकेशन सिस्टम पर RBI का बड़ा निर्देश, आप पर इसका सीधा असर

पुरानी व्यवस्था के तहत चेक क्लियर होने में ज्यादा समय लगता है और साथ ही चेक के कलेक्शन में लागत भी ज्यादा लगती है। अबतक अलग-अलग बैंकों की 1.50 लाख शाखाओं में ही यह व्यवस्था लागू हो सकी है।

सांकेतिक फोटो।

चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) 30 सितंबर से सभी बैंकों में लागू होने जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस संबंध में बैंकों को निर्देश जारी कर दिए हैं। चेक को क्लियर करने की इस नई व्यवस्था के तहत 24 घंटे के भीतर ही चेक क्लियर हो जाएगा।

चेक ट्रंकेशन सिस्टम 2010 में आ गया था लेकिन इस अब बड़े पेमाने पर लागू किया जा रहा है। अबतक अलग-अलग बैंकों की 1.50 लाख शाखाओं में ही यह व्यवस्था लागू हो सकी है। पुरानी व्यवस्था के तहत चेक क्लियर होने में ज्यादा समय लगता है और साथ ही चेक के कलेक्शन में लागत भी ज्यादा लगती है।

इस व्यवस्था के तहत वास्तविक चेक की तस्वीर (ईमेज) के जरिए ही चेक क्लीयरिंग हो जाती है। सीटीएस के तहत भुगतान और जमाओं के लिए कागज रहित (इलेक्ट्रॉनिक इमेज) अभौतिक सत्यापन किया जाता है। यानी चेक को एक जगह से दूसरी जगह (एक बैंक से दूसरे बैंक) घूमना नहीं पड़ता है इस वजह से समय की बचत हो जाती है।

चेक से जुड़ी जानकारियों को इलेक्ट्रानिक माध्यम से जमा करना होता है जो कि चेक जारी करने वाला व्यक्ति ही करता है। मसलन चेक जारी करने वाले व्यक्ति को चेक नंबर, चेक डेट, अकाउंट नंबर, चेक की राशि आदि की जानकारी इलेक्ट्रानिक माध्यम से जमा करनी होती है। खास बात यह है कि इससे फ्रॉड की संभावना भी कम रहती है।

बड़े अमाउंट के लेन-देन के लिए चेक को एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। चेक के जरिए एक खाताधारक बैंक को इस बात की जानकारी देता है कि वे अपने खाते से रकम को किसी दूसरे व्यक्ति (पैसा रिसीव करने वाला शख्स) को ट्रांसफर कर रहा है।

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