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इस तरह करेंगे दावा तो रिजेक्‍ट नहीं होगा हेल्‍थ इंश्‍योरेंस क्‍लेम, जानें प्रक्रिया

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि पॉलिसी होल्डर पॉलिसी लेते वक्त अपनी हेल्थ कंडीशन की पूरी जानकारी उपलब्ध कराता है तो भविष्य में इंश्योरेंस कंपनी स्वास्थ्य की सही जानकारी ना देने को पॉलिसी रद्द करने का आधार नहीं बना सकती।

health insuranceहेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त इन बातों का रखें ख्याल तो नहीं होगा क्लेम रिजेक्ट। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदे जाने के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का खुलासा करना अनिवार्य है। इंश्योरेंस कंपनियां, पॉलिसी खरीदने वाली व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और उसका आकलन करने के बाद ही पॉलिसी प्रीमियम तय करती हैं। लेकिन यदि किसी व्यक्ति द्वारा हेल्थ पॉलिसी खरीदते वक्त अपनी पुरानी बीमारियों या हेल्थ कंडीशन का खुलासा नहीं किया जाता है तो ऐसे में पॉलिसी रद्द होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे में हेल्थ पॉलिसी लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि पॉलिसी होल्डर पॉलिसी लेते वक्त अपनी हेल्थ कंडीशन की पूरी जानकारी उपलब्ध कराता है तो भविष्य में इंश्योरेंस कंपनी स्वास्थ्य की सही जानकारी ना देने को पॉलिसी रद्द करने का आधार नहीं बना सकती। यदि कोई व्यक्ति हेल्थ पॉलिसी लेने के 2-3 साल बाद किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है तो फिर इसकी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को देने की जरुरत नहीं है। दरअसल नियमों के मुताबिक यदि पॉलिसी लेने के बाद व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है तो इसके आधार पर इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम देने से इंकार नहीं कर सकतीं।

जानकारों का कहना है कि यदि पॉलिसी लेने के बाद व्यक्ति को कोई बीमारी हो जाती है, तो उसे पॉलिसी का रिन्यूअल कराते वक्त इसकी जानकारी कंपनी को दे देनी चाहिए। कई कंपनियां अपने ग्राहकों को वैलनेस प्रोग्राम भी मुहैय्या कराती हैं, जिनसे उन्हें बीमारी से रिकवर करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि अपनी हेल्थ कंडीशन की जानकारी से कंपनी को अवगत कराते रहें। खास बात ये है कि इससे पॉलिसी का प्रीमियम भी प्रभावित नहीं होता है।

उदाहरण के लिए यदि आप धुम्रपान करते हैं तो आपको हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त इसकी जानकारी कंपनी को नहीं देते हैं तो संभव है कि इंश्योरेंस क्लेम करते वक्त कंपनी इसी बात को आधार बनाते हुए क्लेम देने से इंकार भी कर सकती है। क्योंकि ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी के पास ये अधिकार है। उसी तरह यदि पॉलिसी लेने के बाद कोई व्यक्ति धुम्रपान शुरु करता है तो इसका असर उसके प्रीमियम पर नहीं पड़ेगा।

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