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ट्रेन में सीट के नीचे छूटा लाखों का हार और लैपटॉप, RPF ने लौटाया तो छलक गईं आंखें, यूं मिली मदद

IRCTC Indian Railways Train Cancellation: सुमंता ने 182 पर कॉल कर बताया कि वे ट्रेन क्रमांक 11020 ( कोनार्क एक्सप्रेस ) से मुंबई लौट रहे थे। ट्रेन जैसे ही कल्याण पहुंची तो उतरने के चक्कर में वह अपना सामान कोच नंबर बी-5 की बर्थ 21-22 के नीचे भूल गए।

नई दिल्लीप्रतीकात्मक तस्वीर, (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

मध्य रेलवे (Central Railway) सुरक्षा बल एक बार फिर हेल्पलाइन नंबर के जरिए मदद मांगने वाली यात्री को राहत पहुंचाकर सबका दिल जीत लिया है। रेलवे की आरपीएफ हेल्पलाइन 182 (RPF Helpline Number 182) पर सुमंता बेहरा नाम के यात्री ने कॉल कर शिकायत किया कि वह कोणार्क एक्सप्रेस (Train Number 11020, Konark Express) में अपना कीमती सामान छूट गया है। इस सामान में तीन लाख रुपये की कीमत का सोने का हार, लैपटॉप और कुछ जरूरी कागजात है।

हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत की: दरअसल सुमंता ने बताया कि वे कोणार्क एक्सप्रेस से मुंबई लौट रहे थे। ट्रेन जैसे ही कल्याण (Kalyan Station) पहुंची तो उतरने के चक्कर में वह अपना सामान कोच नंबर बी-5 की बर्थ 21-22 के नीचे भूल गए। सुमंता ने जब हेल्पलाइन को कॉल किया, तब तक ट्रेन कल्याण से रवाना हो चुकी थी। सुमंता ने जब हेल्पलाइन पर कॉल किया तब तक ट्रेन कल्याण से रवाना हो चुकी थी।

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सुमंता की आखें खुशी से नम हो गई: गौरतलब है कि सुमंता का कॉल रिसीव करने वाली महिला कॉन्स्टेबल पूजा शर्मा ने दादर के एएसआई जेजे तिवारी को अलर्ट किया है। सूचना पाकर तिवारी को प्लेटफॉर्म ड्यटी पर तैनात कर दिया गया। तिवारी जब ट्रेन में आए और उन्होंने कोच को चेक किया तो बताई गई जगह से उनका सुमंता का सामान मिल गया। तिवारी ने इस बात की सूचना तुरंत कल्याण में आरपीएफ चौकी को दी। इसकी जानकारी मिलने के बाद सुमंता की आंखें खुशी से नम हो गई।

किसी के हाथ लगता तो गायब हो सकता था: रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ट्रेन से उतरने की जल्दबाजी में वह अपना सामान भूल जाते हैं। ट्रेन खाली होने के बाद कुछ बोतल बीनने वाले ट्रेन में चढ़ जाते हैं। सोमवार (25 नवंबर) को भी दो-तीन कचरा बीनने वाले ट्रेन में चढ़े थे लेकिन वह एसी कोच तक नहीं पहुंच सके थे। एक अधिकारी ने बताया कि एसी कोच में भी अटेंडेंट कल्याण आने के पहले ही चद्दर, कंबल समेट लेते हैं। यदि किसी के हाथ कीमती सामान लगता, तो कुछ भी हो सकता था।

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