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80 सालों से लगातार घट रहा है मॉनसून का असर, विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण को बताया बड़ी वजह

विशेषज्ञों ने पेड़ों पर बनने वाले छल्लों के आधार पर यह रिसर्च की है। रिसर्च में बताया गया है कि बारिश के समय में पेड़ों पर बनने वाले छल्ले मोटे और बड़े होते हैं, वहीं अकाल या कम बारिश के समय में पेड़ों पर बनने वाले ये छल्ले पतले होते हैं।

वायु प्रदूषण से घट रहा मानसून। (ap photo)

वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है, जिससे इंसानों में कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। अब एक रिसर्च में पता चला है कि वायु प्रदूषण ना सिर्फ इंसानी शरीर पर बल्कि हमारे पर्यावरण पर भी काफी बुरा असर डाल रहा है। रिसर्च के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण बीते 80 सालों में एशियाई मानसून लगातार घट रहा है। बीते 448 सालों से मानसून में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई है। मानसून के घटने और वायु प्रदूषण के बढ़ने के पीछे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन के नॉर्थ हैंपशायर और चीन में तेजी से हुए औद्योगिकरण को बड़ी वजह माना जा रहा है। बता दें कि एशियाई मानसून दुनिया की आधी आबादी को प्रभावित करता है।

रिसर्च में पता चला है कि गर्मियों के दौरान होने वाली बारिश में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पानी की मौजूदगी, पारिस्थितिकी तंत्र और भारत से लेकर साइबेरिया तक कृषि प्रभावित हुई है। साल 1940 से मानसून में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिसके चलते कई इलाकों में अकाल के हालात हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के विशेषज्ञों ने यह रिसर्च की है। विशेषज्ञों ने पेड़ों पर बनने वाले छल्लों के आधार पर यह रिसर्च की है। रिसर्च में बताया गया है कि बारिश के समय में पेड़ों पर बनने वाले छल्ले मोटे और बड़े होते हैं, वहीं अकाल या कम बारिश के समय में पेड़ों पर बनने वाले ये छल्ले पतले होते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पेड़ों के इन रिंग की मदद से उन्होंने बीते 450 साल का डाटा एकत्र किया है। हालांकि पहले भी पेड़ों के रिंग पर आधारित रिसर्च हुई हैं, लेकिन ताजा रिसर्च में काफी पुराने समय तक का डाटा उपलब्ध हुआ है और ज्यादा से ज्यादा पेड़ों पर यह रिसर्च की गई है। रिसर्चर्स के अनुसार, मानसून में कमी वायु प्रदूषण के अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, सोलर सिस्टम में गड़बड़ी आदि भी अहम वजह हैं। Futureity.org की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च में पता चला है कि वायु प्रदूषण के कारण वायुमंडल में सल्फेट की एक परत बन गई है, जिससे मानसून प्रभावित हो रहा है।

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