दिल्ली में जाड़े से पहले पीयूसीसी अनिवार्यः नहीं दिखाया या भागने का किया प्रयास तो लगेगा जुर्माना, हो सकती है कैद

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण से निपटने के लिए इस महीने की शुरुआत में 10सूत्रीय शीतकालीन कार्य योजना की घोषणा की थी जिसमें वाहनों की जांच के लिए 500 टीमों के गठन के साथ पीयूसीसी को सख्ती से लागू करना शामिल है।

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दिल्ली में दोपहर के वक्त स्मॉग। (फाइल फोटोः रॉयटर्स)

दिल्ली परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में सर्दियों के मौसम में होने वाले प्रदूषण के मद्देनजर वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) अनिवार्य किया और वाहन सवार लोगों से संबंधित कागजात ईंधन स्टेशनों पर तैनात उसके दलों को दिखाने की अपील की। विभाग के प्रदूषण नियंत्रण डिवीजन की ओर से जारी आदेश के अनुसार विभाग ने पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं होने वाले वाहनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। आदेश में कहा,‘‘ सभी पंजीकृत वाहन मालिकों से अनुरोध किया जाता है कि वे ईंधन स्टेशनों पर ईंधन भरवाने के वक्त वहां तैनात उसके दलों को जारी वैधता पीयूसी प्रमाणपत्र दिखाएं।’’

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शहर भर में करीब 50 दल तैनात किए जाएंगे। ये दल मुख्य रूप से वाहनों के पीयूसी प्रमाणपत्रों की जांच करेंगे और जिन लोगों के पास ये प्रमाणपत्र नहीं हैं,उनसे प्रमाणपत्र लेने का अनुरोध करेंगे। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,‘‘ इसका मकसद वाहन मालिकों पर जुर्माना करने से ज्यादा उन्हें पीयूसी प्रमाणपत्र लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। लेकिन जो इससे इनकार करेगा या भागने का प्रयास करेगा उन पर जुर्माना किया जाएगा।’’

जो वाहन मालिक वैध पीयूसीसी प्राप्त नहीं करेंगे उनका मोटर वाहन अधिनियम 1993 की धारा 190 (2) के तहत चालान किया जा सकता है। इसमें छह महीने तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही सजा का प्रावधान है। आदेश में कहा गया है कि तीन महीने के लिए उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी जब्त किया जा सकता है।

बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण से निपटने के लिए इस महीने की शुरुआत में 10सूत्रीय शीतकालीन कार्य योजना की घोषणा की थी जिसमें वाहनों की जांच के लिए 500 टीमों के गठन के साथ पीयूसीसी को सख्ती से लागू करना शामिल है। इसी बीच, राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता रविवार की सुबह ”बहुत खराब” श्रेणी में पहुंचने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के के कारण प्रदूषण बढ़ा है क्योंकि वहां की सरकारें इसे रोकने में किसानों की मदद के लिए ‘कुछ नहीं’ कर रही हैं।

उन्होंने पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की सरकारों से पराली जलाने को कम करने एवं प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रति अपनी जिम्मेदारियां समझने की अपील की। केजरीवाल ने शालीमार बाग में एक नये अस्पताल की आधारशिला रखते हुए कहा, ‘‘पिछले एक महीने से मैं दिल्ली में वायु गुणवत्ता को लेकर आंकड़े ट्वीट कर रहा हूं। पिछले तीन-चार दिनों से प्रदूषण बढ़ा है और यह पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण हुआ है। पड़ोसी राज्यों में किसान पराली जलाने को बाध्य हैं क्योंकि सरकारें (पराली जलाने से रोकने के लिए) उनकी खातिर कुछ नहीं कर रही हैं।’’

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