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Monkeypox पर UP में अलर्ट: CMO ने जारी की एडवाइजरी, जानें- क्या कहते हैं दिशा-निर्देश

मंकीपॉक्स, चेचक के समान विषाणुओं वाला है, जो कोविड से धीमी गति वाला संक्रमण फैला सकता है। वायरस श्वसन के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

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Monkeypox को लेकर यूपी ने जारी की एडवाइजरी (फोटो- AP/PTI)

मंकीपॉक्‍स के संक्रमण को लेकर विदेशों में हहाकार मचा हुआ है। इस संबंध में WHO ने भी दुनिया का सतर्क किया है, भारत सरकार भी इस वायरस को लेकर सतर्क है और सभी राज्‍यों और अस्‍पतालों के लिए एडवाइजरी जारी कर चुकी है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने मंकीपॉक्स संक्रमण के संबंध में अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करने का निर्देश दिया है।

यूपी सरकार की एडवाइजरी में कहा गया है कि देश में अब तक मंकीपॉक्स का कोई मामला नहीं आया है, लेकिन सभी अस्पतालों को सतर्क रहना चाहिए। खासकर अगर अंतरराष्ट्रीय यात्रा वाले किसी मरीज में लक्षण दिखाई देते हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने राज्य के उच्च स्वास्थ्य अधिकारियों और जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में निर्देश दिया गया है कि बुखार और शरीर पर चकत्तों से संबंधित मरीजों की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय से साझा की जाए।

वहीं केंद्र सरकार ने भी नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को मंकीपॉक्‍स वायरस पर कड़ी नजर रखने को कहा है। केंद्र ने यह भी कहा है कि अगर किसी भी व्‍यक्ति में इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो इसके सैंपल जांच के लिए पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) को भेजा जाना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में मंकीपॉक्स के मामले बढ़ गए हैं, जिससे कुल संक्रमणों की संख्या 200 हो गई है और 20 देशों में मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 100 से अधिक संदिग्‍ध मामले सामने आए हैं।

मंकीपॉक्स के लक्षण
इस वायरस के लक्षण की बात करें तो इसमें बुखार, तीव्र सिरदर्द, लिम्फैडेनोपैथी (लिम्फ नोड्स की सूजन), पीठ दर्द, मायलगिया (मांसपेशियों में दर्द), और ऊर्जा की कमी, चिकनपॉक्स, खसरा, चेचक आदि जैसे लक्षण दिखाई दे सकता है। चकत्ते निकलने के साथ ही बुखार दिखने के 1-3 दिनों के भीतर शुरू हो जाता है।

मंकीपॉक्स ट्रांसमिशन
मंकीपॉक्स, चेचक के समान विषाणुओं वाला है, जो कोविड से धीमी गति वाला संक्रमण फैला सकता है। वायरस श्वसन के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, जो आंखों, मुंह और नाक में श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा किसी व्यक्ति के संक्रमित घावों या शरीर के संपर्क में आने पर मंकीपॉक्स भी फैल सकता है।

क्‍या है बचाव
ऐसी किसी भी व्‍यक्ति के संपर्क में न आएं, जिसके अंदर इसमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं। उस व्‍यक्ति को आइसोलेट कर सकते हैं साथ ही इस बारे में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को जानकारी दिया जा सकता है। इसके अलावा, उस व्‍यक्ति द्वारा उपयोग की गई कोई भी चीज का इस्‍तेमाल न करें और डॉक्‍टर से सलाह लें।

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