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Indian Railways: फ्लेक्सी फेयर पर रेल यात्रियों को सहूलियत देने की तैयारी में मोदी सरकार

मंत्रालय में यह चर्चा चल रही है कि सितंबर के आसपास जब ट्रेनों में भीड़-भाड़ नहीं रहती, उस समय कुछ ट्रेनों में प्रायोगिक तौर पर एक महीने से लिए फ्लेक्सी किराया को हटाया जा सकता है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

करीब दो साल पहले मोदी सरकार ने विमान किराये की तरह प्रीमियम ट्रेनों में भी ‘फ्लेक्सी किराया’ लागू किया था। चुनावी वर्ष को देखते हुए अब रेल मंत्रालय इस फ्लेक्सी किराये में राहत देने की तैयारी कर रही है। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, “मंत्रालय में यह चर्चा चल रही है कि सितंबर के आसपास जब ट्रेनों में भीड़-भाड़ नहीं रहती, उस समय कुछ ट्रेनों में प्रायोगिक तौर पर एक महीने से लिए फ्लेक्सी किराया को हटाया जा सकता है। चर्चा है कि कम भीड़-भाड़ वाले समय में राजधानी एक्सप्रेस सहित कई प्रीमियम ट्रेनों में 30 फीसद से भी कम सीट बुक हुए थे। सूत्रों ने बताया कि चार्ट की तैयार होने के बाद कम भीड़-भाड़ वाले समय के दौरान खाली बच गए सीटों पर वर्तमान में लागू 10 फीसदी छूट को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। बता दें कि फ्लेक्क्सी सिस्टम के तहत घटती सीटों के साथ किराया बढ़ता जाता है।

रेल भवन में काम करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, “फ्लेक्सी किराये में थोड़ी छूट देने पर विचार किया जा रहा है। अगले सप्ताह तक इस पर फैसला किया जा सकता है। फ्लेक्सी किराए में राहत देने के बाद उन तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे महीनों पहले टिकट बुक करा चुके लोगों के अधिक पैसे को रिफंड किया जा सके।”

ऐसा देखा गया है कि दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली बैंगलुरू जैसे रूट पर काफी कम पैसे में हवाई सुविधा भी मिल रही है, जो कि प्रीमियम ट्रेनों से के किराये से कम है, जिनमें फ्लैक्सी किराया लागू है। मुंबई-दिल्ली राजधानी का किराया 3580 रुपया है और दोनों तरफ की बात करें तो यह करीब 7000 रुपये पड़ता है। वहीं, इसी रूट पर एक महीने पहले फ्लाईट का टिकट बुक कराने पर आने-जाने दोनों का किराया मात्र 5000 रुपया पड़ता है।

 

फ्लेक्सी किराये सिस्टम के तहत बुक टिकट का कैंसिलेशन चार्ज काफी ज्यादा होता है। यही वजह है कि रेलवे ने सितंबर 2016 में इस सिस्टम को लागू करने के बाद रेलवे ने 1,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त कमाए हैं। ऐसे में देखें तो इस तरह की किसी योजना को लागू करने से पहले जिसमें रेलवे के अतिरिक्त कमाई का नुकसान होता है, नियम बनाने वालों के लिए मुश्किल होगा। लेकिन एक तर्क यह भी है कि कुछ समय के लिए फ्लेक्सी सिस्टम में छूट देने से रेलवे की आय में बढ़ोत्तरी होगी।

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