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LIC की जीवन लक्ष्य पॉलिसीः सुरक्षित भविष्य के साथ देती है बचत का बढ़िया विकल्प, जानें योजना के बारे में

LIC की जीवन लक्ष्य पॉलिसीः कोई व्यक्ति कम या ज्यादा प्रीमियम देना चाहे तो यह घट-बढ़ भी सकता है। हालांकि उसी के अनुसार फिर पॉलिसीधारक को मिलने वाली सुविधाएं भी घट-बढ़ जाएंगी।

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LIC की जीवन लक्ष्य पॉलिसीः भविष्य की बचत योजनाओं के लिए लोग कई अलग-अलग विकल्पों पर विचार करते हैं, लेकिन आज भी देश में बचत योजनाओं के लिए एलआईसी का आकर्षण बरकरार है। एलआई भी ऐसी कई बचत योजनाएं पेश करता है, जिनसे जुड़कर लोग अपना और अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। ऐसी ही एक योजना है, जीवन लक्ष्य (833)। इस पॉलिसी का समयकाल 13 से 25 साल के बीच हो सकता है, जबकि शुरुआती तीन साल के प्रीमियम भरना जरूरी होता है।

न्यूनतम 18 साल से लेकर अधिकतम 50 साल का व्यक्ति इस पॉलिसी को ले सकता है। वहीं, 65 वर्ष इस प्लान के तहत अधिकतम मैच्योरिटी उम्र सीमा है। यानी राइडर को इसी उम्र तक अधिकतम दुर्घटना मृत्यु और विकलांगता संबंधी लाभ मिल पाएगा। पॉलिसी के तहत कम से कम एक लाख रुपए की रकम सम एश्योर्ड में आती है, जबकि इस चीज के लिए अधिकतम सीमा नहीं है। यह पॉलिसीधारक की आय पर निर्भर करता है।

क्या हैं प्लान के फायदे?: पॉलिसी मैच्योर होने से पहले अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तब उसके परिजन को सम एश्योर्ड रकम के साथ बोनस और फाइनल एडिश्नल बोनस (अगर होगा तब) भी दिया जाएगा। वार्षिक आय संबंधी लाभ बेसिक सम एश्योर्ड की 10 फीसदी रकम के बराबर होगा, जबकि मैच्योरिटी पर बेसिक सम एश्योर्ड की 110 प्रतिशत एश्योर्ड एबसॉल्यूट रकम दी जाएगी। अगर इसके तहत बोनस और अंतिम अतिरिक्त बोनस दिए जाने होंगे, तो वह भी मिलेंगे। वहीं, सर्वाइवल (जीवित रहते हुए पॉलीसी का समयकाल निकालने पर) की स्थिति में बेसिक सम एश्योर्ड रकम के साथ बोनस और एफएबी (अगर होगा तब) भी दिया जाएगा।

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सरेंडर करने पर क्या होगा?: पॉलिसीधारक अगर किसी कारण प्लान जारी नहीं रखना चाहता है, तब वह पॉलसी सरेंडर भी कर सकता है। यह काम शुरुआती तीन प्रीमियम भरने के बाद कभी भी किया जा सकता है। पर एक्सपर्ट्स की सलाह रहती है कि पॉलिसी को सरेंडर नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्लान खत्म करने के बाद पॉलिसीधारक को मिलने वाली रकम कट-पिट कर मिलती है।

आय कर में भी मिलती है छूटः इस प्लान के जरिए आय कर में भी छूट मिलती है। दरअसल, एलआईसी के जीवन लक्ष्य के तहत भरा जाने वाला प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स रीबेट में मान्य होता है। वहीं, मैच्योरिटी के दौरान मिलने वाली रकम पर धारा 10 (10डी) के अंतर्गत कोई कर नहीं लगता है। यही नहीं, जीवन लक्ष्य में तीन साल प्रीमियम भरने (शुरुआती) के बाद पॉलिसीधारक एलआईसी से लोन निर्धारित रकम तक का ऋण भी ले सकता है।

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