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महंगा तो नहीं पड़ेगा कार-बाइक में ट्यूबलेस टायर डलवाना? पहले जान लें फायदे-नुकसान

बाहर से दिखने में यह टायर भी आम टायर्स जैसा ही होता है। पर इसके भीतर कोई ट्यूब नहीं होता है, जबकि आम टायर्स में ट्यूब में हवा भरी होती है।

भारतीय बाजार में आ रहे ज्यादातर नए वाहनों में ट्यूबलेस टायर दिए जाते हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी गाड़ियों (कार और मोटरबाइक) के विज्ञापनों में इन्हें एक फीचर के तौर पर गिनाती हैं। लेकिन ट्यूबलेस टायर्स को लेकर कई लोगों को भ्रम रहता है ये सामान्य टायर्स से महंगे पड़ते हैं या इन्हें डलवाना फायदेमंद नहीं है। यह बात अच्छे से समझने के लिए आपको पहले ट्यूबलेस टायर और उससे जुड़े फायदों और नुकसान के बारे में जानना जरूरी है।

ट्यूबलेस टायर में क्या होता है?: बाहर से दिखने में ये टायर्स भी आम टायर्स जैसे ही होते हैं। पर इसके भीतर कोई ट्यूब नहीं होता, जबकि आम टायर्स में ट्यूब में हवा भरी होती है। ट्यूबलेस टायर्स में हवा रिम और टायर के बीच में भरी हुई होती है, जो एयरटाइट सील की मदद से भरी जाती है।

ये रहे इसके फायदेः

– ट्यूबलेस टायर में बेवजह होने वाले पंचर की समस्या नहीं आती है। चूंकि सामान्य टायर्स में ट्यूब, टायर और रिम के बीच में होता है, जहां कई बार ट्यूब की रबड़ को नुकसान पहुंचता है। हवा भी इसी कारण लीक होने लगती है। पर ट्यूबलेस टायर्स में यह दिक्कत नहीं होती है।

– ट्यूब या टायर के भीतर हवा का प्रेशर समय दर समय बदलता रहता है, लिहाजा टायर में हवा कम होना आम बात है। पंचर के चलते ट्यूब में हवा कम होने लग जाती है, जिससे कुछ समय बाद ट्यूब खाली तक हो जाता है। ऐसे में गाड़ी चलाने में बेहद दिक्कत होती है। मगर ट्यूबलेस टायर के मामले में ऐसा नहीं होता। इनमें काफी धीमे-धीमे हवा निकलती है।

– ट्यूबलेस टायर्स डलवाने का एक और फायदा भी है। इनमें लिक्विड सीलेंट (पंचर की जगह भरने वाले पदार्थ) भरा होता है। अगर ट्यूबलेस टायर में कोई नुकीली चीज घुस जाए, तब यह सीलेंट अपने आप निकल कर उस छेद वाली जगह पर सूख जाता है। और सरल तरीके से समझें तो यह सीलेंट उस जगह (लीकेज) पर सीलिंग कर देता है।

– ट्यूबलेस टायर में अगर पंचर की समस्या आती भी है, तो हवा धीमे-धीमे निकलती है। ऐसे में वाहन चालक को गंतव्य या सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए काफी समय मिल सकता है।

– ट्यूब टायर्स के मुकाबले ट्यूबलेस टायर वजन में हल्के होते हैं।

जानें ट्यूबलेस टायर्स के नुकसानः

– ट्यूबलेस टायर रिम में बड़ी मुश्किल से फिट होते हैं। ये इसी वजह से फिट होने में अधिक समय लेते हैं। सेटिंग के दौरान रिम को नुकसान न हो, लिहाजा इन्हें किसी मकैनिक या एक्सपर्ट से ही सेट कराना पड़ता है।

– ट्यूबलेस टायर पर हुए पंचर को ठीक करना भी सबके बस की बात नहीं होती। इसके लिए खास किस्म के टूल की जरूरत पड़ती है, जो जरूरी नहीं है कि हर मकैनिक के यहां उपलब्ध हो।

– टायर की साइडवॉल पर हुआ पंचर काफी खतरनाक माना जाता है। ट्यूब टायर में ट्यूब बदलने या उसे लेकर जाने का विकल्प होता है। पर ट्यूबलेस टायर को इस स्थिति में बदलना ही पड़ता है।

– ट्यूबलेस टायर सामान्य टायर्स की तुलना में महंगे आते हैं।

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