Fixed Deposit कराने से पहले जान लीजिए ये बातें, वरना बाद में उठाना पड़ सकता है नुकसान!

वरिष्ठ नागरिक यानी कि सीनियर सिटिजन्स को एफडी पर सभी बैंक अधिक ब्याज देते हैं। इस स्थिति में अगर आपके यहां कोई बुजुर्ग है, तब आप उनके नाम पर एफडी करा लें, जिससे आपको ब्याज के मामले में थोड़ा लाभ मिल जाएगा।

FD, Utility News, National News
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी सुरक्षा के साथ सेविंग्स बढ़ाने का अच्छा तरीका है। पर इसे कराने से पहले इससे जुड़ी सभी अहम बातों और पहलुओं को जान-समझ लेना चाहिए, वरना बाद में नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए जानते हैं एफडी के बारे में कुछ जरूरी बातें:

  • एफडी से पहले आप उसकी अवधि के बारे में अच्छे से सोच लें। दरअसल, एफडी के मैच्योर होने से पहले अगर उसे तोड़ा जाता (पैसा निकालना) है, तब उस व्यक्ति को कुछ जुर्माना भी भरना पड़ता है।
  • टैक्स सेविंग एफडी में पांच साल तक के लिए इन्वेस्टमेंट करेंगे, तब आप आयकर में डिस्काउंट पा सकते हैं। इसमें ब्याज पर भी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। वैसे, अगर किसी वित्त वर्ष में एफडी पर कमाया गया इंट्रेस्ट 10 हजार रुपए से अधिक है, तब उस पर 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस कटता है।
  • कभी भी मोटी रकम को एक ही एफडी में ब्लॉक न करें। मान लीजिए कि आपका मूड 20 लाख रुपए की एफडी कराने का है। इस स्थिति में आप एक-एक लाख रुपए की 10 एफडी, दो-दो लाख की चार एफडी और -50-50 हजार रुपए की चार एफडी करा सकते हैं। ये एफडी आप अलग-अलग बैंकों में कराएं। फायदा क्या होगा- पैसों की जरूरत पड़ने पर आप रकम के हिसाब से इनमें से किसी एक या दो को ब्रेक करा के पैसे पा सकेंगे और आपकी अन्य एफडी सुरक्षित रहेंगी और उन पर ब्याज बनता रहेगा।
  • वरिष्ठ नागरिक यानी कि सीनियर सिटिजन्स को एफडी पर सभी बैंक अधिक ब्याज देते हैं। इस स्थिति में अगर आपके यहां कोई बुजुर्ग है, तब आप उनके नाम पर एफडी करा लें, जिससे आपको ब्याज के मामले में थोड़ा लाभ मिल जाएगा।
  • एक और चीज कि बैंकों में पहले तीन महीने में या फिर सालाना आधार पर इंट्रेस्ट निकालने का विकल्प हुआ करता था, लेकिन अब कुछ बैंकों में महीने में इस रकम को निकाला जा सकता है। यह चीज आप अपनी आवश्यक्ता के हिसाब से देख सकते हैं।

FD की ये हैं खासियतें:

  • आपके डिपॉजिट पर मिलने वाला रिटर्न सेफ है। मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव का उस पर असर नहीं पड़ता।
  • एनबीएफसी की ओर से दी जाने वाली एफडी ब्याज दरें बैंकों की एफफी ब्याज दरों से ज्यादा होती हैं।
  • इसे रिन्यू कराना भी आसान है।
  • इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 के मुताबिक, मिलने वाले ब्याज पर टैक्स मूल रकम के हिसाब से काटा जाता है।

पढें यूटिलिटी न्यूज समाचार (Utility News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट