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कम समय के लिए चाहिए बिजनेस लोन तो ये हैं रास्‍ते, जानिए नियम व शर्तें

शॉर्ट टर्म लोन कुछ महीनों से लेकर एक साल तक की अवधि का होता है। हालांकि, इस लोन पर ब्याज की दर लॉग टर्म लोन की तुलना अधिक होती है।

Bank, Loan, Bank Loanतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (फाइल फोटो)

किसी भी बिजनेस में उतार-चढ़ाव बना रहता है। उत्पादन के समय अधिक पूंजी की जरूरत होती है। इसके साथ ही जब बाजार में गिरावट का दौर चलता है तो उस समय भी कंपनियों के पास कुछ समय के लिए पैसों का अभाव हो जाता है। उन्हें तत्काल कुछ पैसे चाहिए होते हैं, ताकि बिजनेस पर किसी तरह का निगेटिव इंपैक्ट न पड़े। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ही बैंक व अन्य वित्तिय संस्थान व्यवसायियों को शॉर्ट टर्म बिजनेस लोन देते हैं ताकि वे अपने व्यवसाय को चला सकें। बाजार में बने रह सकें। कुछ बैंक व वित्तिय संस्थान आकर्षक ब्याज दरों पर 30 लाख रुपये तक का शॉर्ट टर्म लोन देते हैं।

शॉर्ट टर्म बिजनेस लोन: व्यवसाय को आर्थिक संकट से उबारने और इसे बाजार में बनाए रखने के लिए बैंकों व अन्य वित्तिय संस्थानों द्वारा शॉर्ट टर्म बिजनेस लोन दिया जाता है। यह शॉर्ट टर्म लोन कुछ महीनों से लेकर एक साल तक की अवधि का होता है। हालांकि, इस लोन पर ब्याज की दर लॉग टर्म लोन की तुलना में काफी अधिक होती है। बता दें कि लॉग टर्म लोन की अवधि 15 सालों तक भी हो सकती है और इसमें ब्याज दर काफी कम होती है। उदाहरण के तौर पर घर के लिए लोन, शिक्षा के लिए लोन, प्रोपर्ट पर लिया गया लोन लंबी अवधि के लिए होता है। वहीं, शॉर्ट टर्म लोन बिजनेस में अचानक पैसे की जरूरत को पूरा करने के लिए लिया जाता है।

शॉर्ट टर्म लोन के प्रकार:-
वर्किंग कैपिटल लोन: वर्किंग कैपिटल लोन वह फंड होता है जिससे आप बिजनेस की प्रतिदिन की जरूरतों जैसे बिल, कैश की जरूरत, कर्मचारियों की सैलरी, दुकान में सामान लाने जैसे कार्यों के लिए प्रयोग कर सकते हैं। ये असुरक्षित लोन होते हैं, जिसका उपयोग छोटे और मध्यम दर्जे के वैसे व्यवसायी करते हैं, जिनका व्यवसाय प्रतिदिन की खरीद-बिक्री के हिसाब से चलता है।

उपकरण और औजार खरीदने के लिए लोन: किसी भी निर्माण उद्योग के दौरान एक मशीन में खराबी पूरे धंधे को चौपट कर सकती है। ऐसी स्थिति में यदि पास में पैसे न हो तो लोन की सहायता से नए उपकरण व औजार खरीदे जा सकते हैं। साथ ही अपने व्यवसाय के लिए कंप्यूटर और प्रिंटर की भी खरीद की जा सकती है।

फ्लेक्सी बिजनेस लोन: फ्लेक्सी बिजनेस लोन के तहत व्यवसायी के लिए एक निश्चित राशि दी जाती है जिसका उपयोग वे अपनी आवश्यकता के अनुसार कर सकते हैं। इसकी खास बात यह है कि व्यवसायी जितने समय के लिए पैसे का उपयोग करते हैं, उतने ही समय तक ब्याज लगता है।

सिक्योरिटी पर लोन: इस प्रकार के लोन के लिए बैंकों या वित्तिय संस्थानों के पास कंपनी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, बॉन्ड्स इत्यादी जमा करने होते है। इसके बाद लोन दिया जाता है। इसका फायदा ये होता है अपनी संपत्तियों को बेचे बिना कुछ समय के लिए पैसों की जरूरत पूरी होती है।

क्रेडिट कार्ड लोन: क्रेडिट कार्ड के माध्यम से उपयोगकर्ता कुछ समय के लिए तय क्रेडिट का उपयोग कर अपनी जरूरतों को पूरी कर सकते हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां क्रेडिट लिमिट से ज्यादा के उपयोग की भी इजाजत देती है। लेकिन इसे जमा करने की अवधि 2 से 6 महीने के बीच होती है।

ओवर ड्राफ्ट: यदि आपके बैंक खाते में उतने पैसे नहीं है, जितने की आपको अचानक जरूरत आ पड़ी है तो आप ओवरड्राफ्ट के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, इस ओवरड्राफ्ट की लिमिट भी तय रहती है। जितने समय के लिए आप ज्यादा रकम का प्रयोग करेंगे, उतने ही समय के लिए ब्याज देना होगा।

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