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BHIM, Google Pay या PhonePe पर ट्रांजेक्शन में विवाद? जानें कहां और कैसे कर सकते हैं शिकायत

अगर आप भी भीम, गूगल पे या फिर फोन पे सरीखे यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ऐप्स पर ट्रांजेक्शन के दौरान फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं, तब कुछ खास बातों का ख्याल रखकर आप इस प्रकार के मामलों से आसानी से निपट सकते हैं।

Online Fraud, Digital Payments Fraud, Digital Fraud, UPI, BHIM, PhonePe, Google Pay, PayTM, Ombudsmen, Cyber Crime Cell, Banks, Police, Digital Payments Apps, Banks, Utility News, Business News, Hindi Newsतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

25 साल के अमित सांघवी हाल ही में ऑनलाइन ट्राजेंक्शन के दौरान ठगी का शिकार हुए। उन्होंने एक यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ऐप से 20,000 हजार रुपए घर वालों को भेजना चाहे, पर ट्रांजेक्शन फेल हो गया। जयपुर में सांघवी के घर वालों को यह रकम तो नहीं पहुंची, पर उनके खाते से ये पैसे जरूर गायब हो गए। उन्होंने इस बारे ऐप के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत भी दी, पर कुछ न हुआ। उल्टा, बाद में पता लगा कि वह हेल्पलाइन नंबर फर्जी था।

ऐसे में अगर आप भी भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम), गूगल पे या फिर फोन पे सरीखे यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ऐप्स पर ट्रांजेक्शन के दौरान फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं या फिर आपको भी गड़बड़ होने का शक हो, तब कुछ खास बातों का ख्याल रखकर आप इस प्रकार के मामलों से निपट सकते हैं। जानिए ऑनलाइन फर्जीवाड़े और ठगी का शिकार होने पर कहां और कैसे शिकायत की जाती हैः

– सहेज कर रखें ट्रांजेक्शन डीटेल्सः यूपीआई ऐप से लिंक बैंक खाते में किसी संदिग्ध गतिविधि का शक हो या फिर ऑनलाइन फर्जीवाड़े का शिकार हो जाएं, तब यूपीआई ऐप पर हुए ट्रांजेक्शंस के स्क्रीनशॉट जरूर रख लें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ट्रांजेक्शन आईडी और बैंक खाते के डीटेल्स अहम होते हैं। पुलिस, बैंक या फिर यूपीआई ऐप कंपनियों के पास शिकायत करने के दौरान ये चीजें मददगार साबित होती हैं।

– पासवर्ड में करें फेरबदलः जे.सागर एसोसिएट्स में साझेदार संजय सिंह के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया- गड़बड़ होने या उसके शक पर लोगों को यूपीआई ऐप पर अपना पासवर्ड/पिन भी बदल लेना चाहिए, ताकि जालसाज आपके बैंक खाते में चूना न लगा सके।

– बैंक से फौरन करें शिकायतः यूपीआई ऐप से लिंक बैंक खाते में अगर आपके साथ जालसाजी की गई है, तब तत्काल बैंक को कॉल या फिर मेल के जरिए शिकायत दें। साथ ही उस खाते में भविष्य में किए जाने वाले सभी यूपीआई ट्रांजेक्शंस को भी ब्लॉक करा दें।

– यूपीआई ऐप कंपनी को भी मामला बताएं: एक्सपर्ट्स की मानें तो इस प्रकार के मामलों से यूपीआई ऐप बनाने वाली कंपनियों को भी अवगत कराना चाहिए। जानकारी के मुताबिक, ऐसे मामले बैंक या फिर यूपीआई कंपनी के पास रजिस्टर होने के 10 दिनों के भीतर निपट जाने चाहिए।

– सायबर क्राइम सेल को भी दें इत्तेलाः बैंक और यूपीआई ऐप कंपनी के साथ ही पुलिस में भी लिखित शिकायत देनी चाहिए। एफआईआर दर्ज कराकर उसे सायबर क्राइम सेल के पास भी बढ़ाना (अगर आपके नजदीकी पुलिस थाने का पास यह विभाग न हो तब) चाहिए। ऐसे डिजिटल फ्रॉड और जालसाजी के मामलों से निपटने में सायबर क्राइम सेल माहिर माना जाता है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट के ओंबुड्समैन के पास भी ऐसे मुद्दे उठाए जा सकते हैं।

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