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यात्रा के दौरान खराब हो गई कार तो इंश्यारेंस कंपनी करेगी मदद, जानें फायदा उठाने का तरीका

आम तौर पर आरएसए पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति के घर से 100 से 500 किमी के दायरे तक हो सकता है। यह चीज बीमा पॉलिसी और कंपनियों के हिसाब से निर्भर करती है।

Author नई दिल्ली | July 16, 2019 8:25 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

यात्रा के दौरान कार खराब हो जाने पर इंश्योरेंस कंपनी से मदद हासिल की जा सकती है। फिर चाहे दिन हो या रात, हाईवे हो या पहाड़ी इलाका। अगर सही जानकारी और तरीका पता होगा तो आप वहीं मदद पा सकेंगे। दरअसल, कार के बीमा के साथ रोडसाइड असिस्टेंस नंबर भी आता है, जिस पर मुसीबत की घड़ी में कॉल करने पर बीमा कंपनी फंसे व्यक्ति की मदद करती है।

क्या है RSA और रोड ट्रिप में यह कैसे करेगा काम?: ‘डिजिट इंश्योरेंस’ में हेड ऑफ मार्केटिंग विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक, आरएसए को रोडसाइड असिस्टेंस भी कहा जाता है। यह ब्रेक डाउन असिस्टेंस कवर के नाम से भी जाना जाता है। कार इंश्योरेंस लेते या उसे रीन्यू कराते वक्त इसे लेना बड़ा लाभदायक होता है, क्योंकि यह न सिर्फ शहर के भीतर कारगर साबित होता है, बल्कि दूर-दराज वाले इलाकों में भी बड़े काम का साबित होता है।

आम तौर पर आरएसए पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति के घर से 100 से 500 किमी के दायरे तक हो सकता है। यह चीज बीमा पॉलिसी और कंपनियों के हिसाब से निर्भर करती है। मान लीजिए कि आप शहर से बाहर लॉन्ग ड्राइव पर निकले और अचानक कार खराब हो जाए। उस स्थिति में यह रोडसाइड असिस्टेंस काम आता है। ये चीजें इसके तहत कवर होती हैं:

– गाड़ी बंद होने के बाद अगर बैट्री बदलने की नौबत आती है, तब कार बीमा करने वाली कंपनी रिपेयरिंग (लेबर चार्ज) का खर्च खुद उठाती है, जबकि ग्राहक को सिर्फ नई बैट्री के पैसे चुकाने पड़ते हैं।

– चाभी खो जाने या फिर गाड़ी का दरवाजा खोलने की स्थिति में बीमा कंपनी गाड़ी की डुप्लीकेट चाभी और गाड़ी से जुड़े टेक्नीशियन भी मुहैया कराती है।

– कार इंश्योरेंस कंपनी इसके अलावा टायर पंचर, बस्ट होने की हालत में उसे ठीक करने या फिर बदलने के लिए नजदीकी रिपेयरिंग सेंटर या लोकेशन पर टेक्निशियन भी भेजती है, ताकि पीड़ित की कार सही हो जाए। ऐसी स्थिति में पीड़ित को सिर्फ नए टायर के लिए पैसे देने पड़ते हैं, जबकि लेबर चार्ज का खर्च कंपनी ही उठाती है।

– रोडसाइड असिस्टेंस लेने पर गाड़ी ठीक करने के लिए फोन पर एक्सपर्ट्स बातचीत के जरिए भी मदद करते हैं और मुसीबत से निपटने के हल बताते हैं। जरूरत पड़ने पर वे मौके पर टेक्नीशियन भी भेजते हैं।

– बीच सफर में गाड़ी खराब होने और फंसने के दौरान रोडसाइड असिस्टेंस वाले पीड़ित के परिजनों तक जरूरी संदेश भी पहुंचवाते हैं।

– बीमा कंपनी पीड़ित को मुसीबत में पांच लीटर तक पेट्रोल भी मुहैया कराती है। हालांकि, इसके लिए व्यक्ति को तेल के पैसे चुकाने होते हैं और ऐसा तभी होता है, जब गाड़ी दूषित ईंधन की वजह बंद हुई हो।

नोटः सबसे अच्छी बात है कि इससे आपका नो क्लेम बोनस किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होता। आरएसए का इस्तेमाल करना क्लेम में नहीं गिना जाता है।

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