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क्या होती है Aadhaar KYC? जानिए इसका तरीका और फायदा

UIDAI केवल एक सुरक्षित चैनल के माध्यम से छेड़छाड़ न होने वाले डिजिटल डॉक्यूमेंट को शेयर करता है। यदि आप कहीं कागजी दस्तावेज देते हैं, तो उसमें छेड़छाड़ हो सकती है, लेकिन इसमें नहीं।

Author नई दिल्ली | Published on: June 24, 2019 5:41 PM
आधार कार्ड (प्रतीकात्मक तस्वीर- इंडियन एक्सप्रेस)

कई बार ऐसे मौके आते हैं जब आपको केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर यदि आप बैंक अकाउंट खोलना चाहते हैं या म्यूच्यूअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, तो केवाईसी कराना जरूरी हो जाता है। एक आधार कार्ड केवाईसी इसके लिए सबसे आसान है। इसे बोलचाल की भाषा में ‘ई-केवाईसी’ भी कहते हैं। इसमें किसी तरह के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि आधार नंबर वेरिफिकेशन से ही हो जाता है। समय की बचत होती ही है, कागजी प्रक्रियाओं से भी निजात मिलता है।

आधार ई-केवाईसी प्रक्रिया: आधार कार्ड का निर्माण बायोमेट्रिक सूचनाओं के साथ होता है। जब आधार कार्ड बनता है तो उसी समय उंगलियों के निशान, चेहरे की तस्वीर, आंखों की पुतलियों के निशान सहित तमात जरूरी सूचनाएं ले ली जाती है। इसलिए इसके माध्यम से केवाईसी आसानी से हो जाती है।

– केवाईसी के लिए अपना आधार कार्ड सर्विस प्रोवाइडर (बैंक, वित्तिय संस्थान या अन्य) को दें। वे आपका आधार नंबर लिखेंगे।
– अब बायोमिट्रिक स्कैनर की मदद से आपकी आंखों की पुतलियों के निशान या फिंगरप्रिंट लिए जाएंगे।
– आप मोबाइल आधारित वन टाईम पासवर्ड विकल्प का भी चुनाव कर सकते हैं।
– जब आपका बायोमिट्रिक ले लिया जाएगा, उसे यूआईडीएआई के पास भेजा जाएगा। वहां से मिलान होते ही आपकी सभी जानकारी सर्विस प्रोवाइडर के पास पहुंच जाएगी।

ई-केवाईसी के फायदे: आधार आधारित ई-केवाईसी के कई फायदे हैं। सबसे अहम चीज ये है कि आज हम पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहे हैं और ई-केवाईसी की वजह से कागजों की बचत होती है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। साथ ही कागज ले जाने और रखने का झंझट भी दूर हो जाता है।

– UIDAI केवल एक सुरक्षित चैनल के माध्यम से छेड़छाड़ न होने वाले डिजिटल डॉक्यूमेंट को शेयर करता है। यदि आप कहीं कागजी दस्तावेज देते हैं, तो उसमें छेड़छाड़ हो सकती है, लेकिन इसमें नहीं।
– यह पहचान को सुरक्षित रखने में मदद करता है। फर्जी डॉक्यूमेंट मिलने की कोई संभावना नहीं है और इसका उपयोग सर्विस प्रोवाइडर या आधार रखने वाले की सहमति के बिना भी नहीं किया जा सकता है।
– यूआईडीएआई द्वारा साझा की गई जानकारी में प्रामाणिक डेटा शामिल होगा जो इसे लेनदेन में शामिल होने वाली पार्टियों के लिए स्वीकार्य और कानूनी बनाता है।
– ई-केवाईसी पेपरलेस और ऑनलाइन प्रक्रिया है। इसमें खर्च न के बराबर होता है।

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