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TERM PLAN में नहीं मिलेगा एक भी पैसा, अगर इन 8 वजहों से हुई मौत!

इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसीधारक को कब और किस शर्त पर उसका पैसा देगी यह पूर्व निर्धारित होता है। अगर किसी पॉलिसीधारक की प्राकृतिक आपदा और क्रिमिनल मामले में मौत हो जाती है तो उसे एक भी पैसा नहीं मिलता।

kerala bumper lottery, kerala bumper lottery results, kerala bumper lottery results 2019, kerala monsoon bumper lottery 2019, kerala monsoon bumper lottery result, kerala monsoon bumper lottery result 2019, kerala lottery today results, kerala lottery resultsतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लोग लाइफ इंश्योरेंस प्लान में पैसा इनवेस्ट करते हैं। अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियां अनेक फायदे गिना ग्राहकों को इनसे जोड़ती है। ग्राहक भी इसमें अपना फायदा देख इनवेस्ट कर देते हैं। लेकिन इन लाइफ इंश्योरेंस प्लान के साथ कई ऐसी शर्तें होती हैं जिन्हें हम अकसर अनदेखा कर देते हैं या फिर जिनके बारे में हमें बताया नहीं जाता। कंपनियां पॉलिसीधारक को कब और किस शर्त पर उसका पैसा देगी यह पूर्व निर्धारित होता है। अगर किसी पॉलिसीधारक की प्राकृतिक आपदा और क्रिमिनल मामले में मौत हो जाती है तो उसे एक भी पैसा नहीं मिलता। कंपनी ने ऐसी ही कुल 8 शर्तें रखी हैं। किसी पॉलिसीधारक की मौत इन 8 शर्तों के मुताबिक होती है तो उसे लाइफ इंश्योरेंस प्लान का एक भी पैसा नहीं दिया जाता। आइए जानते हैं ये आठ शर्तें कौन-कौन सी हैं।

1. पॉलिसीधारक का मर्डर: अगर किसी पॉलिसी धारक का मर्डर हो जाता है और जांच में यह पता चलता है कि वह किसी क्राइम में भागीदार था तो कंपनी उसे पैसा नहीं देगी। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, IndianMoney.com के सीईओ सीएस सुधीर ने कहा ‘पॉलिसीधारक को पैसा तभी मिलेगा जब उससे हत्या के आरोप हटा लिए जाए या फिर उसे बरी कर दिया जाए। कंपनी पॉलिसीधारक का भुगतान तब तक नहीं करेगी जब तक मामले में नॉमिनी के पक्ष में फैसला नहीं आ जाए।’

वहीं अगर अगर पॉलिसीधारक की मौत आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से होती है तो तब भी उसे इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाएगा। इसपर Life Insurance, Policybazaar.com के चीफ बिजनेस ऑफिसर संतोष अग्रवाल कहते हैं ‘ऐसे पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाएगा जिसकी आपराधिक गतिविधियों में रहते मौत हो गई हो। कानून द्वारा परिभाषित किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के कारण पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता।’ उन्होंने कहा ‘अगर पॉलिसी होल्डर आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा हो लेकिन उसकी मौत डेंगू, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से होती है तो फिर इंश्योरेंस क्लेम दिया जाता है।’

2. अल्कोहल की वजह से मौत: अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत अल्कोहल की वजह से होती है तो उसे इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता। सुधीर के मुताबिक कंपनियां उन पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती जो भारी मात्रा में शराब पीते हैं और नशीली दवाओं का सेवन करते हैं। अगर पॉलिसीधारक प्लान लेते वक्त इस बात का जिक्र नहीं करते कि वह भारी मात्रा में शराब पीते हैं तो कंपनियां पॉलिसीधारक की मौत होने पर इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती।

3. स्मोकिंग की आदत की जानकारी छिपाना: अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो टर्म प्लान लेते वक्त इसके बारे में कंपनी को जानकारी दें। स्मोकिंग करने वालों को अक्सर हेल्थ से जुड़ी समस्याएं प्रभावित करती हैं। अगर पॉलिसीधारक कंपनी को यह नहीं बताते कि वे भारी मात्रा में स्मोकिंग करते हैं और स्मोकिंग की वजह से पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो फिर कंपनी इंश्योरेंस क्लेम का पैसा नहीं देती।

4. खतरनाक गतिविधियों में शामिल होना: अगर किसी पॉलिसीधारक की एडवेंचर और खतरनाक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से मौत हो जाती है तो कंपनी इंश्योरेंस क्लेम से इनकार कर देती है। क्योंकि ये वे गतिविधियां हैं जिनमें पॉलिसीधारक अपनी जिंदगी को खतरे में डालते हैं। अग्रवाल बताते हैं ‘अगर पॉलिसीधारक की कार और बाइक रेसिंग, स्काईडाविंग, पैरागलाइडिंग, पैराशुटिंग और हाईकिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स में मौत हो जाती है तो कंपनी इंश्योरेंस क्लेम करने की अनुमति नहीं देती।’

5. एचआईवी और ड्रग ओवरडोज: कंपनी ऐसे पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम की अनुमति नहीं देती जिनकी मौत एचआईवी और ड्रग ओवरडोज से होती है। सुधीर के मुताबिक शारीरिक बीमारी जैसे की एचआईवी या एड्स से होने वाली मौत पर कंपनी इंश्योरेंस क्लेम के लिए मना करती हैं। इसके साथ ही ड्रग ओवरडोज से अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत होती है तो भी इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिलता।

6. प्रसव के कारण मौत: प्रसव के दौरान अगर पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो कंपनी इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती। अग्रवाल के मुताबिक ‘प्रेगनेंसी के दौरान, या फिर प्रसव के दौरान होने वाली मौत पर इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता।’

7. मौत की वजह आत्महत्या: अगर कोई पॉलिसीधारक आत्महत्या कर लेता है तो भी कंपनी इंश्योरेंस क्लेम से इनकार कर सकती है। अगर पॉलिसीधारक टर्म प्लान लेने के एक साल के अंदर आत्महत्या कर लेता है तो नॉमिनी को इंश्योरेंस क्लेम की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि अधिकांश कंपनियां पॉलिसी खरीद की तारीख के दूसरे वर्ष से आत्महत्या कवरेज प्रदान करते हैं।

8. प्राकृति आपदा से मौत: अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत प्राकृतिक आपदा जैसे कि भूकंप या फिर तूफान आदि से होती है तो नॉमिनी को इशोयरेंस क्लेम नहीं दिया जाता। सुधीर न बताते हैं ‘भूकंप, सुनामी आदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण मृत्यु भी इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत नहीं आती।’

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