Indian Railways 50 हजार युवाओं को देगा मुफ्त ट्रेनिंग, जानिए- आप कैसे हो सकते हैं Rail Kaushal Vikas Yojana में शामिल?

रेल कौशल विकास योजना के तहत देश भर से चयनित अभ्यर्थियों को रेलवे के 75 प्रशिक्षण संस्थानों में 100 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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रेलवे प्लेटफॉर्म की सफाई करता एक कर्मचारी। (एक्सप्रेस फोटो: निर्मला हरिंद्रण)

Rail Kaushal Vikas Yojana: प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सरकार की तरफ से रेल कौशल विकास योजना के तहत 50 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत 18 से 35 साल तक युवाओं को टेनिंग दी जाएगी। युवाओं को चार ट्रेड- इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट और फिटर में ट्रेनिंग दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार रेल कौशल विकास योजना के तहत देश भर से चयनित अभ्यर्थियों को रेलवे के 75 प्रशिक्षण संस्थानों में 100 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पाठ्यक्रम बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने विकसित किया है। यह इस योजना के लिए नोडल इकाई है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रशिक्षुओं को रेलवे/ राष्ट्रीय रेल एवं परिवहन संस्थान द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

क्या है योग्यता?: अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10 वी पास होने चाहिए। साथ ही अभ्यर्थी की उम्र सीमा 18 से 35 साल के बीच होना चाहिए। इसके लिए भारत का नागरिक होना भी अनिवार्य है। छात्रों का चयन मार्क्स के आधार पर किया जाएगा। बताते चलें कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत का एक हिस्सा है।

बताते चलें कि साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) ने भी नागपुर डिवीजन और वर्कशॉप मोतीबाग में अप्रेंटिस एक्ट 1961 के तहत 339 ट्रेड अप्रेंटिस वेकेंसी के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार SECR की आधिकारिक वेबसाइट secr.indianrailways.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। SECR भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर, 2021 है।

गौरतलब है कि आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत मोदी सरकार ने 21 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था, लेकिन इसके तहत घोषित दो स्कीमों की 40 फीसदी फंडिंग का बोझ राज्य सरकारों पर डाला गया था। प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना और फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रॉसेसिंग इंटरप्राइजेज स्कीम को केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी। मत्स्य पालन सेक्टर को मजबूती देने के लिए मोदी सरकार ने 20,050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस राशि में 9,407 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होगी और 4,880 करोड़ रुपये राज्यों की ओर से दिया जाएगा। इसके अलावा 5,763 रुपये की हिस्सेदारी लाभार्थियों की होगी।

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