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Indian Railways Rule: पालतू कुत्‍ते के साथ करना है सफर तो यह है नियम

Indian Railways Rule for carrying Dogs/Pets in Train: रेलवे नियमों के अनुसार जानवरों के गुम होने, नुकसान, चोट लगने या फिर उनकी डिलीवरी न हो पाने पर इसके लिए भारतीय रेल जिम्मेदार नहीं होगा।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः नरेंद्र कुमार)

Indian Railways Rule for carrying Dogs/Pets in Train: भारतीय रेल, यात्रियों को पालतू जानवरों के साथ सफर करने की सुविधा भी मुहैया कराता है। हालांकि, इसके लिए कुछ नियम-कायदे और शुल्क होता है, जिसके पालन के बाद कोई भी अपना कुत्ता ट्रेन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह तक ले जा सकता है। जानिए इसी के बारे में:

– यात्री पालतू लैब्राडॉर, बॉक्सर और जर्मन शेफर्ड को साथ में एसी फर्स्ट क्लास या फिर फर्स्ट क्लास में ही ले जा सकता है। हालांकि, इसके लिए उसे ट्रेन में पूरा कंपार्टमेंट बुक कराना पड़ेगा।

– एसी फर्स्ट क्लास में पालतू कुत्ता साथ लेकर चलने के लिए यात्री को शुल्क के अलावा सहयात्रियों की सहमति भी लेनी होगी, जबकि संबंधित शुल्क पहले ही ले लिया जाएगा। अगर सहयात्री ने कुत्ते को लेकर आपत्ति जताई, तब उसे गार्ड की वैन में शिफ्ट कर दिया जाएगा और इस स्थिति में पालतू कुत्ते ले जाने वाले को कोई रिफंड नहीं मिलेगा।

– छोटे कुत्तों के लिए अन्य डिब्बों में रेलवे ने कुछ डिब्बों की व्यवस्था भी कर रखी है। यात्री इनके लिए सामान्य किराया चुका कर अपने पालतू कुत्ते साथ ले जा सकते हैं। यह शुल्क कुत्ते और डिब्बे के वजन पर भी निर्भर करता है।
– कुत्ता साथ ले जाने के लिए यात्री को सबसे पहले पार्सल ऑफिस में संपर्क करना होगा, जहां वह पेट की बुकिंग करा सकेंगे।

– अगर कोई यात्री फर्स्ट क्लास में बगैर कुत्ते की बुकिंग के उसे साथ ले जाता पाया गया, तब उससे लगेज स्केल रेट की छह गुणा रकम वसूली जाएगी।

– 12 साल से कम की उम्र के बच्चे के साथ यात्री करने वाली अकेली महिला को डॉग बॉक्स रेट्स के हिसाब से शुल्क देने के बाद कंपार्टमेंट में साथ एक ही कुत्ता ले जाने की अनुमति होगी। कुत्ते को महिला की मर्जी के बाद ही कंपार्टमेंट में रहने की जगह मिलेगी।

– अगर कोई कुत्ता बगैर बुकिंग के ट्रेन में पाया गया, तब उस सफर (डिस्टैंस – किलोमीटर के हिसाब से) पर उसके मालिक से डॉग बॉक्स रेट के आधार पर दोगुणी रकम वसूली जाएगी। यह प्रति कुत्ते के हिसाब से न्यूनतम 20 रुपए हो सकती है।

– रेलवे किसी भी यात्री को एसी स्लीपर कोच, एसी चेयर कार कोच, स्लीपर क्लास और जनरल कोच में पालतू कुत्ते साथ लेकर चलने की मंजूरी नहीं देता। अगर कोई ऐसा करते पाया जाता है, तब उसके पालतू जानवर को तत्काल ट्रेन रुकवा कर ब्रेक वैन में शिफ्ट किया जाता है, जबकि लगेज स्केल रेट के हिसाब से उसके मालिक से छह गुणा पेनाल्टी ली जाती है।

– आकार में जो बड़े कुत्ते ब्रेक वैन के डॉग बॉक्स में नहीं आ पाते हैं, उन्हें घोड़े लाने के लिए जो नियम और शर्तें लागू होती हैं, उन पर एक स्पेशल वाहन में लाया जाता है।

ये भी जान लें: ट्रेन में कुत्ता साथ ले जाने के लिए पार्सल ऑफिस संपर्क करें, जहां कुत्ते के आकार और वजन के हिसाब से शुल्क देने के बाद यात्री को बुकिंग स्लिप दी जाएगी। यही स्लिप कुत्ते के लिए टिकट होगा। कुत्ता चाहे ट्रेन के कंपार्टमेंट में जाए या लगेज वैन में, पर उसके लिए इस स्लिप को साथ रखना यात्री के लिए जरूरी होगा। और हां, रेलवे नियमों के अनुसार जानवरों के गुम होने, नुकसान, चोट लगने या फिर उनकी डिलीवरी न हो पाने पर इसके लिए भारतीय रेल जिम्मेदार नहीं होगा।

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