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सीनियर सिटीजन को छूट की मांग के बीच आई खास जानकारी, लोवर कैटेगरी में रियायत को लेकर हुआ सबसे कम घाटा

Senior citizen concession: महामारी से पहले जब किराए में छूट की सुविधा सीनियर सिटीजन को दी जा रही थी तो वर्ष 2019-20 में, वरिष्ठ नागरिकों ने रेल यात्रा के सभी वर्गों में 1,667 करोड़ रुपए की रियायतों का लाभ उठाया था।

सीनियर सिटीजन को छूट की मांग के बीच आई खास जानकारी, लोवर कैटेगरी में रियायत को लेकर हुआ सबसे कम घाटा
टिकट में छूट नहीं देने की रेलमंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी थी। (फोटो- Freepik)

सीनियर सिटीजन को टिकट में छूट की मांग को लेकर रेलमंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि रियायत को फिर से शुरू करना “वांछनीय नहीं है”। टिकट में यह छूट कोरोना काल के समय से ही रोका गया है, जिसे लागू करने की राह आसान नहीं लग रही। संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान, रेल मंत्री ने लोकसभा को सीनियर सिटीजन को किराए में छूट को लेकर सुविधा शुरू नहीं करने की जानकारी दी थी।

इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से पहले जब किराए में छूट की सुविधा सीनियर सिटीजन को दी जा रही थी तो वर्ष 2019-20 में, वरिष्ठ नागरिकों ने रेल यात्रा के सभी वर्गों में 1,667 करोड़ रुपए की रियायतों का लाभ उठाया था। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी। वहीं अनरिजर्व टिकटों के कारण रेलवे द्वारा छोड़े गए राजस्व, जो कि ज्यादातर ट्रेन यात्रा का सबसे निचला वर्ग है, लगभग 215 करोड़ रुपए है। गैर-एसी स्लीपर खंड में उस वर्ष लगभग 451 करोड़ रुपए का राजस्व छोड़ा गया था।

वहीं सीनियर सिटीजन रियायतों की बहाली के लिए बढ़ती मांग के बीच, इसे वापस लाने के तरीकों की तलाश कर रही है, जो रेलवे के खजाने पर कम से कम बोझ डाले। सूत्रों ने द इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया कि चूंकि नॉन एसी स्लीपर और सामान्य वर्ग में मिलने वाली रियायतों से होने वाली राजस्व हानि उच्च कक्षाओं की तुलना में कम है, इसलिए इन दोनों वर्गों में इसे वापस लाने की संभावना पर व‍िचार किया जा रहा है।

एक समीक्षा आंकड़ों के अनुसार, कुल राजस्व के कारण वरिष्ठ नागरिक रियायत का बोझ 2017-18 में 1,492 करोड़ रुपए से बढ़कर 2019-20 में 1,667 करोड़ रुपए हो गया था, जबकि अनारक्षित टिकट एक मानक 200 करोड़ रुपये या उसके आसपास हर साल बनी हुई थी। अनारक्षित में 2017-18 में 212 करोड़ रुपए का बोझ था, जो अगले साल बढ़कर 223 करोड़ रुपए हो गया, लेकिन 2019-20 में घटकर 215 करोड़ रुपए रह गया था। इसी तरह, गैर-एसी स्लीपर श्रेणी के कारण राजस्व हानि 2017-18 में 427 करोड़ रुपए से बढ़कर अगले वर्ष 458 करोड़ रुपए हो गई, लेकिन अगले वर्ष घटकर 451 करोड़ रुपए हो गई थी।

सबसे लोकप्रिय कैटेगरी, एसी III-टियर में वरिष्ठ नागरिक रियायत के कारण राजस्व हानि साल दर साल बढ़ती रही है। 2017-18 में घाटा 419 करोड़ रुपए था, जो अगले साल बढ़कर 474 करोड़ रुपए हो गया और 2019-20 में यह लगभग 504 करोड़ रुपए था। रियायतों के बिना, रेलवे वास्तव में एसी-थर्ड कैटेगरी में एक छोटा सा लाभ कमाता है। एसी II-टियर में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें राजस्व चार साल पहले 247 करोड़ रुपए से बढ़कर 2019-20 में 285 करोड़ रुपए हो गया है।

बता दें कि वरिष्ठ नागरिक – 58 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाएं और 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुष को छूट दिए जाते थे।

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