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जानें कैसे पता करें टायर की उम्र और कम या ज्‍यादा हवा भराने का नुकसान

ऑटो एक्सपर्ट्स की मानें तो टायर हमेशा सेट में बदलने चाहिए। ऐसा कतई न करें कि अगला टायर घिसा है, तो सिर्फ उसे ही बदलें। हो सके तो दूसरे टायर को भी बदलवा लें, क्योंकि वह भी उतने ही दबाव को झेल चुका होगा।

मोटरसाइकिल के टायर घिसने (गंजे होने) पर ही अधिकतर लोगों का ध्यान इन पर जाता है। मगर यह लापरवाही या गलती न सिर्फ मोटरसाइकिल की परफॉर्मेंस प्रभावित करती है। बल्कि हादसों को भी न्योता देती है। ऐसे में आपको बाइक के टायर्स का ख्याल रखने की सख्त जरूरत है। पर इसके लिए ये भी जानना जरूरी है कि एक टायर की औसत उम्र क्या होती है? उसे कब बदलना चाहिए? एशर प्रेशर कितना हो? अगर आपको ये सारी चीजें नहीं पता तो हम इन सवालों के जवाब बताएंगे।

टायर रबड़ के बने होते हैं, जो कि ऑर्गैनिक मटीरियल है। अच्छी रबड़ से बने टायर औसतन पांच से सात साल चलते हैं। इन्हें बदलने का सही वक्त तब होता है, जब 1.59 एमएम (2/32″ या 0.063 इंच) ट्रेड पूरे टायर पर बचा रह जाए। ट्रेड, टायर के ऊपर निकली डिजाइनदार आउटर लेयर होती है।

ऑटो एक्सपर्ट्स की मानें तो टायर हमेशा जोड़े में बदलने चाहिए। ऐसा कतई न करें कि अगला टायर घिसा है, तो सिर्फ उसे ही बदलें। हो सके तो दूसरे टायर को भी बदलवा लें, क्योंकि वह भी सड़क पर उतने ही दबाव को झेल चुका होगा, जितना कि दूसरे पहले वाले ने सहा होगा। हालांकि, अधिक पुराना न होने पर उसे (पुराना एक टायर) इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

टायर की उम्र का पता उसकी मैनुफैक्चरिंग डेट भी से लगाया जा सकता है। यह जानकारी टायर के साइडवॉल पर लिखी रहती है। चार अंकों के कोड में यह दी जाती है। मसलन 2304 लिखा होगा, तो उसका मतलब है कि वह टायर साल 2004 के 23वें हफ्ते में मैनुफैक्चर किया गया, जबकि 0313 से समझा जाना चाहिए कि टायर 2013 से तीसरे हफ्ते में बनाया गया।

तस्वीर में समझें टायर का ढांचा। (फोटो सोर्सः en.wikipedia.org)

टिप– शहर में ज्यादातर मोटरसाइकिल चलाने वालों के लिए रेडियल टायर बेहतर रहते हैं। ये अपनी बनावट के कारण सड़कों पर भीषण गर्मी झेल जाते हैं। इन टायरों के भीतर रबड़ के नीचे स्टील की पतली सी परत होती है।

वहीं, किसी भी बाइक चालक के लिए टायर का एयर प्रेशर काफी मायने रखता है। कम ही लोग जानते हैं, पर इनमें हवा कम या अधिक भराने से भी नुकसान हो सकता है। सीधे तौर पर यह बात टायर की उम्र पर प्रभाव डालता है। हो सके तो बाइक मैनुअल के अनुसार हवा टायर में भराएं। अधिक हवा भरा कर बाइक चलाएंगे (खासकर अकेले), तो टायर सामान्य स्थिति के मुकाबले जल्दी घिसेंगे।

एक्सपर्ट्स की ये टिप्स भी आएंगी कामः

– अगर मोटरबाइक ट्यूब वाले टायर के साथ आई थी या बनी है, तो उसमें ट्यूबलेस टायर न डलाएं। ऐसा करने पर हवा लीक होने की आशंका रहती है।

– ज्यादातर शहर में ही बाइक से आना-जाना होता है, तब रेस कंपाउंड वाले टायरों पर पैसे न फूंकें। कारण- ट्रैफिक लाइट पर बार-बार रुकने और ब्रेक के इस्तेमाल से आप उन टायर्स का असल लाभ नहीं ले पाएंगे।

– अगले टायर के मुकाबले पिछला टायर अधिक मजबूत ग्रिप वाला न चुनें। ऐसा करने पर अगले और पिछले टायर के बीच संतुलन नहीं बनेगा।

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