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ऑनलाइन खाना मंगाने पर कैसे कटती है आपकी जेब- मुंबई के एक शख्स ने बिल शेयर कर बताया

दोनों खाद्य बिलों की तुलना करके बताया कि ऑफलाइन ऑर्डर 512 रुपए पर आया था, जबकि एक कंपनी द्वारा ऑनलाइन भोजन ऑर्डर सर्विस की कीमत 690 रुपए पर आई थी।

ऑनलाइन खाना मंगाने पर कैसे कटती है आपकी जेब- मुंबई के एक शख्स ने बिल शेयर कर बताया
ऑनलाइन खाना मंगाने पर कैसे कटती है आपकी जेब (फोटो- Freepik)

अगर आप भी ऑनलाइन खाना मंगाते हैं तो आपको यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए। मुंबई के एक शख्‍स राहुल काबरा ने एक ही व्यंजन के ऑनलाइन और ऑफलाइन फूड ऑर्डर बिलों की तुलना की और पाया कि कीमतों में भारी असमानता है। उन्‍होंने लिंक्डइन पर ऑर्डर बिल की जानकारी शेयर की है, जिसके नतीजे हैरान करने वाले हैं।

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सीधे रेस्तरां से ऑर्डर किया और फिर उसी रेस्तरां से ऑनलाइन भोजन सप्‍लाई सर्विस के माध्यम से उसी भोजन का ऑर्डर दिया, तो उन्हें अंतिम बिलिंग राशि में भारी अंतर मिला। इससे यह जानकारी मिलती है कि कैसे ऑनलाइन खाद्य वितरण सेवाएं, ऑफलाइन रेस्तरां ऑर्डर की तुलना में प्रति ऑर्डर अधिक लाभ ले रहे हैं।

राहुल ने दोनों खाद्य बिलों की तुलना करके बताया कि ऑफलाइन ऑर्डर 512 रुपए पर आया था, जबकि एक कंपनी द्वारा ऑनलाइन भोजन ऑर्डर सर्विस की कीमत 690 रुपए पर आई और वह भी 75 रुपए की छूट के बाद। फूड ऑर्डर बिलों की तुलना करने के बाद, राहुल ने कहा कि ”ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं खाद्य सेवा आसानी से ऑर्डर प्रोवाइड कराती हैं, लेकिन क्या इसे इतनी अधिक कीमत वसूल करनी चाहिए? मुझे लगता है कि इस लागत वृद्धि को सीमित करने की आवश्यकता है जिसे सरकार इसे सभी हितधारकों के लिए लाभकारी बनाने के लिए इसे लागू करना चाहिए।”

वहीं राहुल के जवाब में ऑनलाइन खाद्य सुविधा देने वाली कंपनी ने कहा कि ”हम एक ग्राहक और एक रेस्तरां को जोड़ते हैं, कहा कि रेस्तरां भागीदारों द्वारा लागू की गई कीमतों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। उसने कहा रेस्टोरेंट पार्टनर को राहुल की प्रतिक्रिया से अवगत करा दिया है और उनसे इस पर गौर करने का अनुरोध किया है।”

वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फूड डिलीवरी बिल सामने आने के बाद बिल को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां अतिरिक्त शुल्क ले रही हैं क्योंकि वे ग्राहक की सुविधा पर सेवा कर रहे हैं या वे अपने सॉफ़्टवेयर के माध्यम से कीमतों को नियंत्रित करने का लाभ उठा रहे हैं।

एक यूजर ने राहुल की पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि यह उनकी छिपी हुई व्यावसायिक प्‍लानिंग है। साथ ही जब आप किसी साइट या ऐप के मालिक होते हैं, तो आपका पूरा नियंत्रण होता है, इसलिए वे बिना रेस्तरां की जानकारी में आसानी से व्यंजनों की कीमत बदल सकते हैं।

ऑनलाइन खाद्य वितरण कंपनी का समर्थन करने वाले एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा कि इसे उचित बनाने के लिए कृपया अपनी यात्रा की ईंधन लागत जोड़ें और रेस्तरां भोजन कीमत जोड़े। इसके अलावा, यात्रा के समय के लिए अपने समय में मूल्य जोड़ें। इसके साथ ही घर पर भोजन प्राप्त कराने की सुविधा का भी जिक्र करें।

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