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Monkeypox से कितना सतर्क रहने की जरूरत? जानें- कैसे फैलता है, इलाज व एक्‍सपर्ट की सलाह

Monkeypox virus Symptoms: मंकीपॉक्स के लक्षणों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, तेज सिरदर्द, सूजी हुई लिम्फ नोड्स, त्वचा पर चकत्ते या घाव, कम ऊर्जा और पीठ दर्द शामिल हैं।

Monkeypox Virus | Mokeypox vs COVID-19
मंकीपॉक्‍स को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी (फोटो-रॉयटर्स)

कोविड-19 महामारी के बाद मंकीपॉक्‍स एक और खतरनाक वायरस के रूप में सामने आया। इसके मामले यूरोक के साथ संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका, कनाडा और ऑस्‍ट्रेलिया में भी दर्ज किए गए हैं। वहीं भारत समेत जिन देशों में मंकीपॉक्‍स के मामले नहीं आए हैं, वहां भी इसे लेकर सतर्कता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्‍स के 80 कंफर्म और लगभग 50 संदिग्ध मामलों के बारे में शुक्रवार को जानकारी दी है।

वहीं कुछ देशों में इसके मामलों में तेजी देखी गई है या देखी जा सकती है, इसमें अफ्रिका के कुछ हिस्सों में, फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन और पुर्तगाल जैसे देश शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ पहले ही दुनिया को इसके तेजी से फैलने के बारे में जानकारी दे चुका है। ऐसे में इस वायरस के बारे में जानना बेहद जरुरी हो जाता है, तो आइए जानते हैं इस वायरस के फैलने से लेकर इलाज और एक्‍सपर्ट की सलाह आदि के बारे में सबकुछ।

मंकीपॉक्स वायरस – यह क्या है?
मंकीपॉक्स वायरस पोक्सविरिडे परिवार में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस का सदस्य है। सीधे शब्दों में कहें तो यह एक वायरल जूनोटिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के भागों में मिलता है। यह पहले जंगली जानवरों और फिर लोगों में फैलता है, जिसके समान्‍य से लक्षण हैं जैसे बुखार, सिरदर्द और त्‍वचा पर चकत्ते पड़ जाना आदि। WHO के अनुसार, इसके दो स्‍ट्रेन कांगो, जिसमें 10 फीसद मृत्‍यु दर और पश्चिमी अफ्रीकी स्‍ट्रेन, जिसमें एक फीसद मौत दर है।

विषाणु कैसे फैलता है?
जब लोग किसी संक्रमित जानवर के निकट शारीरिक संपर्क में आते हैं, विशेष रूप से बीमार या मृत जानवर के संपर्क में आने पर वायरस उछलता है। इसमें मांस या रक्त के साथ संपर्क होते ही जानवर से मनुष्‍य के अंदर ट्रांसफर हो जाता है। डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी है कि ऐसे में मांस को अच्‍छी तरह से पकाया जाना चाहिए।

मंकीपॉक्स लोगों के बीच भी फैल सकता है: अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट शारीरिक संपर्क रखते हैं तो आप इसे पकड़ सकते हैं। कपड़े, बिस्तर और तौलिये, और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस से दूषित खाने के बर्तन/बर्तन जैसी वस्तुएं भी आपको संक्रमित कर सकती हैं। WHO के अनुसार, भ्रूण या नवजात शिशु में भी संक्रमण फैल सकता है। किशोरों और वयस्कों की तुलना बच्‍चों के अंदर भी वायरस तेजी से फैल सकता है।

क्‍या हैं लक्षण?
मंकीपॉक्स के लक्षणों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, तेज सिरदर्द, सूजी हुई लिम्फ नोड्स, त्वचा पर चकत्ते या घाव, कम ऊर्जा और पीठ दर्द शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि यह दो से चार हफ्तों तक चलने वाली बीमारी है। अभी तक इसमें मौत दर तीन से छह फीसद रही है।

क्या मंकीपॉक्स यौन संचारित है?
मंकीपॉक्स को पहले यौन संचारित संक्रमण के रूप में नहीं बताया गया है। हालाकि शाररिक संबंध के दौरान त्वचा पर घावों के माध्यम से फैस सकता है। इस बात की जानकारी नहीं है कि यह वीर्य या योनि तरल पदार्थ के माध्यम से फैलता है। क्योंकि जननांगों और मुंह के अंदर भी चकत्ते उभर सकते हैं।

मंकीपॉक्स के लक्षण होने पर आपको क्या करना चाहिए?
जिन लोगों को लगता है कि उनमें मंकीपॉक्स के लक्षण हैं, उन्हें सलाह, परीक्षण और चिकित्सा देखभाल के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संपर्क करना चाहिए। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि संभव हो तो खुद ही अलग रहें और दूसरों के साथ निकट संपर्क से बचें। साथ ही नियमित रूप से अपने हाथों को साफ करने करें।

मंकीपॉक्स का इलाज क्या है?
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि लक्षण अक्सर उपचार की आवश्यकता के बिना खत्‍म हो जाते हैं, लेकिन चकत्ते और घाव को सूखने दें या इसे ठीक करने के लिए ड्रेसिंग या समान्‍य इलाज, ‘घावों के समय पर किया जाने वाला’ लिया जा सकता है। मुंह या आंखों में घावों को छूने से बचें।

यदि आप अपना मुंह कुल्ला करना चाहते हैं या आई ड्रॉप का उपयोग करना चाहते हैं तो ऐसे उत्पादों से बचें जिनमें कोर्टिसोन होता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, गंभीर मामलों के लिए वैक्सीनिया इम्यून ग्लोब्युलिन (वीआईजी) की सिफारिश की जा सकती है।

क्या कोई टीके हैं?
चेचक के इलाज के लिए विकसित एक एंटीवायरल (टेकोविरिमैट, जिसे टीपीओएक्सएक्स के रूप में व्यावसायीकरण किया गया है) को मंकीपॉक्स के इलाज के लिए अप्रुवल दी गई है। चेचक के लिए अन्य टीके सीमित सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं क्योंकि दोनों रोग एक समान लक्षण वाले दिखते हैं। चेचक के टीके लगाने वाले लोगों को मंकीपॉक्स से कुछ सुरक्षा मिलेगी। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि 1980 में टीकाकरण समाप्त होने के बाद से 40-50 आयु वर्ग के लोगों को चेचक के खिलाफ टीका लगाए जाने की संभावना नहीं है।

एक्‍सपर्ट ने क्‍या कहा
डॉ ईश्वर गिलाडा ने बताया कि मंकीपॉक्स एचआईवी की तरह जूनोटिक है जो शुरू में बंदर वायरस के रूप में आया था जिसे सिमियन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस कहा जाता है। ऐसे वायरस जानवरों में फैलते हैं और इंसानों तक पहुंच जाते हैं। यह बहुत शक्तिशाली एंटी-वायरल नहीं है। इसके वायरल बदलते रहते हैं।

घबराने की जरुरत नहीं
मंकीपॉक्स पर डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि इसके बारे में अध्‍ययन करके जानकारी लेनी चाहिए और लक्षण देखकर बताए गए गाइडलाइन को फॉलो करना चाहिए।

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