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HOME LOANS में पत्नी को बनाया है को-एप्लिकेंट? फायदे के साथ हैं कई बड़े नुकसान, जान लीजिए ये बारीकियां

अगर आप ने Home Loan के लिए अपनी पत्नी को को-एप्लिकेंट बनाया है तो इसके कई फायदे हैं और नुकसान भी है। इस खबर में आप ज्वाइंट लोन की बारीकियां जान सकते हैं...

Author नई दिल्ली | Updated: September 17, 2019 8:14 PM
सांकेतिक तस्वीर।

Home Loan Benefits and Drawbacks: क्या आपने अपनी पत्नी के साथ मिलकर लोन लेने का सोचा है? अगर आपकी सैलरी कम है और आप अपनी पत्नी के साथ मिलकर अपने सपनों का घर खरीदना चाहते हैं तो ज्वॉइंट लोन के जरिए आप अपनी ये हसरत पूरी कर सकते हैं। अगर आप ने Home Loan के लिए अपनी पत्नी को को-एप्लिकेंट बनाया है तो इसके कई फायदे हैं और नुकसान भी है। इस खबर में आप ज्वाइंट लोन की बारीकियां जान सकते हैं…

बड़ा लोन: व्यक्तिगत लोन की तुलना में अगर आप दो लोग मिलकर लोन लेते हैं तो आपको ज्यादा लोन लेने में आसानी होगी। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए की व्यक्तिगत लोन की सीमा 30 लाख है और आपके को-एप्लिकेंट के साथ आने से आपको 20 लाख और मिल सकते हैं। ऐसे में आपको 50 लाख तक का लोन मिल सकता है और आप बड़ी रकम देकर ज्यादा अच्छा घर खरीद सकते हैं।

छूट के मौके:
कुछ बैंक महिलाओं के एप्लिकेंट होने पर ब्याज दरों में कटौती की सुविधा देते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन के लिए अलग- अलग राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी भी महिलाओं और कपल्स के लिए फ्री है।

टैक्स बचत: ज्वाइंट लोन लेने का एक बड़ा फायदा यह है कि आपको टैक्स में बड़ी राहत मिल सकती है। सेक्शन 80C के तहत मूल राशि पर 1.5 लाख की कर छूट मिलती है।इस आधार पर दो लोगों के ज्वाइंट लोन पर 3 लाख तक की बचत हो सकेगी। इसके अलावा धारा 24 के तहत, अपने घर के लिए गए लोन में भुगतान किए गए ब्याज पर 2 लाख रुपये की कटौती 4 लाख रुपये तक बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति के रूप में, आप 3.5 लाख रुपये के कर छूट मिलती है तो कपल्स के लिए 7 लाख रुपये तक यह छूट हो सकती है।
यह तो रही फायदे की बात, अगर नुकसान की बात करें तो…

तलाक या मृत्यु: अगर अपने को-एप्लिकेंट की मौत यो जाती है या पत्नी को-एप्लिकेंट है और उससे तलाक हो जाता है तो लोन का सीधा भार साथी एप्लिकेंट के कंधों पर आ जाता है। ऐसे में अगर लोन नहीं चुकाया जाता है तो बैंक को अधिकार है कि वह आपकी संपत्ति सीज कर दे।

लिमिटेड शेयर: यदि पति की वसीयत के बिना मृत्यु हो जाती है और पत्नी को एप्लिकेंट है तो उसे कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में संपत्ति का केवल एक तिहाई हिस्सा मिलेगा, क्योंकि संपत्ति मृतक के माता-पिता, पत्नी और बच्चों में विभाजित हो जाएगी।

क्रेडिट स्कोर:
अगर लोन मिलने के बाद पति-पत्नी में मनमुटाव होता है और समय पर इएमआई नहीं भरी जाती है तो ऐसे में दोनों के क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ेगा और भविष्य में उन्हें लोन मिलने में समस्या होगी।

इन सभी मुश्किलों से बचने का आसान तरीका है कि आवेदक और सह आवेदक दोनों के पास इंश्योंरेंस हो जिसके कवर में होम लोन की बात का जिक्र हो। इसके अलावा लोन के दौरान दोनों के बीच में कर्ज की राशि के भुगतान के लिए दोनों के बीच एग्रीमेंट होना चाहिए ताकि विवाद के समय लोन की राशि को लेकर आने वाली समस्या को आसानी से सुलझाया जा सके।

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