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HEALTH INSURANCE लेकर भी हो जाएगा ‘धोखा’! खरीदते वक्त ध्यान में रखें ये 5 बातें

HEALTH INSURANCE: हेल्थ इंश्योरेंस लेते हुए कई बातों का ध्यान रखना जरुरी है, वरना इसमें आपको 'धोखा' भी मिल सकता है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 14, 2019 5:16 PM
प्रतीकत्मक तस्वीर

HEALTH INSURANCE: आज के समय में इलाज कराना इतना महंगा हो गया है कि एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति के लिए यह आसान नहीं रहा है। हालात ये हैं कि मध्यमवर्गीय व्यक्ति जीवन भर बचत कर पैसे बचाता है और यदि एक मेडिकल इमरजेंसी आ जाए तो उसकी जीवनभर की बचत इलाज में खर्च हो जाती है। यही वजह है कि मेडिकल इंश्योरेंस आज के समय में जरुरत बनकर उभरे हैं। लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस लेते हुए कई बातों का ध्यान रखना जरुरी है, वरना इसमें आपको ‘धोखा’ भी मिल सकता है और आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। इन पांच बातों का रखें ध्यान-

एक व्यक्ति कवर है या फैमिली प्लानः हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त हमें यह ध्यान रखने की जरुरत है कि इंश्योरेंस के तहत एक व्यक्ति कवर है या फिर यह फैमिली प्लान है। कई बार लोग इस पर ध्यान नहीं देते और एक व्यक्ति कवर वाला ही इंश्योरेंस प्लान ले लेते हैं, लेकिन जब वह अपने परिवार के किसी सदस्य का इलाज कराने जाते हैं तो उन्हें इंश्योरेंस कवर नहीं मिलता। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस लेते हुए इस बात का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।

कितने कवर की होगी जरुरतः आज जब इलाज दिनों-दिन महंगा होता जा रहा है, तो इस बात की जानकारी होना बेहद जरुरी है कि हमारे लिए कितना कवर काफी होगा। कई बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति कवर लेते हुए कम कवर वाला इंश्योरेंस ले लेता है, लेकिन यदि किसी आपात स्थिति में इलाज का खर्च तय कवर से ज्यादा हो जाए तो व्यक्ति का काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

कैशलैस है या रिंबर्समेंट इंश्योरेंसः इंश्योरेंस लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है कि जो इंश्योरेंस आप ले रहे हैं, वो कैशलेस है या फिर रिंबर्समेंट इंश्योरेंस। रिंबर्समेंट इंश्योरेंस में व्यक्ति को इलाज के खर्च का भुगतान खुद करना होता है और फिर बाद में इलाज के कागजात इंश्योरेंस कंपनी में जमा कर पैसा मिलता है। वहीं कैशलैस इंश्योरेंस में व्यक्ति को कोई भुगतान नहीं करना होता और कंपनी खुद ही अस्पताल को भुगतान करती है। ऐसे में व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त इस बात का भी जरुर ध्यान रखें, वरना परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

कौन-सी बीमारी कवर नहीं होगी, इसका ध्यान रखना जरुरीः हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त यह ध्यान देना जरुरी है कि आपके इंश्योरेंस में कौन-कौन सी बीमारी कवर नहीं होगी। बता दें कि कई इंश्योरेंस में एड्स, डेंटल ट्रीटमेंट, साइकोलॉजी डिसऑर्डर, जेंडर चेंज सर्जरी आदि कवर नहीं होती, ऐसे में इंश्योरेंस लेते वक्त इस पर ध्यान देना जरुरी है, वरना आपके साथ ‘धोखा’ हो सकता है।

वेटिंग पीरियड का ध्यान रखना जरुरीः हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का वेटिंग पीरियड 30-90 दिनों का होता है। मतलब ये है कि पॉलिसी लेने के बाद 30-90 दिन के बाद ही पॉलिसीधारक का इलाज इंश्योरेंस में कवर होगा। हालांकि एक्सीडेंटल कंडीशन पॉलिसी में पहले दिन से ही लागू हो जाती हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है। इसके साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कराते वक्त यह भी ध्यान रखना जरुरी है कि भविष्य में पॉलिसी के कवर को बढ़ाया जा सके। ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

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