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इस्तेमाल करते हैं HDFC क्रेडिट कार्ड तो हो जाएं सावधान, लेट पेमेंट चार्ज में हुआ बदलाव- ऐसे बचा सकते हैं अपना पैसा

एचडीएफसी बैंक ने अपने क्रेडिट कार्ड पर लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू हो जाएगा। 

HDFC क्रेडिट कार्ड के लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव हुआ। (फाइल फोटो)

HDFC Bank: यदि आप एचडीएफसी बैंक का क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाएं। बैंक ने अपने क्रेडिट कार्ड लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव किया है। बैंक 500 रुपये से अधिक मासिक स्टेटमेंट बैलेंस पर पहले से ज्यादा लेट चार्ज लेगी। यह नया रेट 1 अप्रैल 2019 से लागू हो जाएगा। इसलिए, एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने वाले कार्डहोल्डर को निर्धारित तिथि से पहले अपना बकाया राशि जमा कर देने की कोशिश करनी चाहिए। बता दें कि लेट पेमेंट चार्ज किसी भी कार्ड पर तब लगता है जब कार्डहोल्डर निर्धारित समय पर बकाया राशि जमा नहीं कर पाते हैं। सभी क्रेडिट कार्ड पर न्यूनतम देय राशि कुल बकाया राशि का 5 प्रतिशत होता है। लेट पेमेंट चार्ज से बचने के लिए कार्डहोल्डर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो भी बकाया राशि हो, उसे निर्धारित तिथि तक जमा कर दें।

इनफिनिया कार्ड को छोड़कर एचडीएफसी कार्ड पर संशोधित शुल्क निम्न है:
1. स्टेटमेंट बैलेंस 100 रुपये
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: शून्य
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: शून्य

2. स्टेटमेंट बैलेंस 100 रुपये से 500 रुपये तक
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 100 रुपये
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 100 रुपये

3. स्टेटमेंट बैलेंस 501 रुपये से 5000 रुपये तक
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 400 रुपये
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 500 रुपये

4. स्टेटमेंट बैलेंस 5001 रुपये से 10,000 रुपये तक
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 500 रुपये
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 600 रुपये

5. स्टेटमेंट बैलेंस 10,000 रुपये से 25,000 रुपये तक
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 750 रुपये
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 800 रुपये

6. स्टेटमेंट बैलेंस 25,000 रुपये से ज्यादा
31 मार्च 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 750 रुपये
1 अप्रैल 2019 तक लेट पेमेंट चार्ज: 950 रुपये

निर्धारित तिथि पर कार्डहोल्डर के पास तीन विकल्प होते हैं। पहला ये कि या तो वे कुल शेष रकम का 5 प्रतिशत लेट चार्ज के रूप में जमा करें, दूसरा ये कि आंशिक भुगतान करें या तीसरा ये कि वे पूरे बकाया राशि को जमा करें। यदि पूरी राशि जमा हो जाती है तो किसी तरह का ब्याज दर नहीं लगता है।

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