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Independence Day 2018: भूलकर न इस्तेमाल करें प्लास्टिक का तिरंगा, राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े ये नियम जान लें

Happy Independence Day 2018 (स्‍वतंत्रता दिवस 2018): प्लास्टिक के बने तिरंगे कार्यक्रमों के बाद जगह-जगह बिखरे रहते हैं। पेपर के झंडों के मुकाबले उनका निस्तारण भी कठिन होता है। नतीजतन जगह-जगह बेतरतीब तरीके से पड़े तिरंगे का अपमान होता है।

राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते अगर कोई सार्वजनिक स्थल पर पकड़ा जाता है, तो उसके लिए सजा का भी प्रावधान है। (फोटोः Freepik)

Happy Independence Day 2018 (स्‍वतंत्रता दिवस 2018): स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) से दो दिन पहले केंद्र सरकार ने देश के सभी नागरिकों से प्लास्टिक के तिरंगे न इस्तेमाल करने की अपील की है। गृह मंत्रालय ने इसके साथ ही जारी की एडवाइजरी में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित कराने के लिए कहा है कि हर जगह राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों का पालन हो।

चूंकि प्लास्टिक के बने तिरंगे झंडारोहण व अन्य कार्यक्रमों के बाद जगह-जगह बिखरे रहते हैं। पेपर के झंडों के मुकाबले उनका निस्तारण भी कठिन होता है। नतीजतन जगह-जगह बेतरतीब तरीके से पड़े होना राष्ट्रीय ध्वज के लिए अपमान से कम नहीं होता। ऐसे में आप भी भूलकर प्लास्टिक के बने तिरंगे कतई न इस्तेमाल करें। आइए जानते हैं कि क्या कहता है ‘द फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002’

– राष्ट्रीय ध्वज में तीन आयताकार पैनल हों। ये चौड़ाई में बराबर हों। सबसे ऊपर केसरिया (सैफरॉन), बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग हो। बीच के पैनल में नेवी ब्लू रंग में अशोक चक्र की डिजाइन हो, जिसमें 24 तीलियां होनी चाहिए। चक्र की डिजाइन स्क्रीन प्रिंटिंग, प्रिटिंग, स्टेंसिल या फिर एंब्रॉयड्री के जरिए बनी हो। यह भी जरूरी है कि तिरंगे में यह दोनों ओर से दिखे।

– झंडा हाथ से ऊन/कॉटन/सिल्क या खादी के कपड़े पर काता या बुना गया हो।

– तिरंगा हमेशा आयताकार होना चाहिए। लंबाई और चौड़ाई में इसका अनुपात 3:2 का हो।

– किसी भी हालत में यह जमीन या पानी से नहीं छूना चाहिए।

– झंडा कभी भी ऐसे न रखा जाए, जिससे इसे नुकसान पहुंचे या वह खराब हो।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है (फोटोः Pixabay)

तिरंगे के साथ क्या नहीं करना चाहिए

– किसी भी इमारत पर इसे आधा नहीं फहराया जाना चाहिए। हालांकि, सरकारी इमारतों या दफ्तर पर कुछ खास मौके पर इसकी छूट दी जाती है।

– झंडा शरीर पर लपेटने के काम में भी नहीं लाया जाना चाहिए। ध्यान रहे ये किसी निजी अंतिम संस्कार में भी इस्तेमाल न हो।

– राष्ट्रीय ध्वज किसी कॉस्ट्यूम या यूनिफॉर्म का हिस्सा भी न हो। सोफा के कुशन, रुमाल, नैप्किन या किसी अन्य ड्रेस मटीरियल पर भी इसकी आकृति नहीं होनी चाहिए।

– किसी प्रतिमा पर से अनावरण हटाते समय देश के झंडे को उससे अलग रखा जाना चाहिए। गलती से भी झंडे से उस मूर्ति को ढंके नहीं।

– यह किसी भी वाहन, ट्रेन, नाव या वायुयान के आगे, ऊपर, पीछे या किनारों पर लिपटा नहीं होना चाहिए। न ही किसी इमारत को ढंकने के लिए यह इस्तेमाल हो।

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– झंडे के कलर कॉम्बिनेशन में भी छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। मसलन केसरिया रंग कभी भी नीचे न दिखाया जाए।

– कटा, फटा, पुराना व गंदा झंडा कभी भी फहराने के काम में नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

– अगर तिरंगा बुरी हालत में हो, तो उसका निस्तारण बिल्कुल एकांत में या निजी तरीके से किया जाए। तिरंगे की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए इसे दफनाना या किसी अन्य तरीके से निस्तारित किया जाना चाहिए।

उल्लंघन पर सजा और जुर्मानाः ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ के मुताबिक, अगर सार्वजनिक स्थल या किसी अन्य जगह पर झंडे को जलाया, फाड़ा या किसी भी रूप में इसका अपमान किया जाता है, तो उस शख्स को तीन साल की जेल के साथ जुर्माना हो सकता है।

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