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EPFO: कंपनी बंद हो गई तो आपके पीएफ के पैसे का क्या होगा? पढ़ लें ये अहम खबर

EPFO, EPFO Latest News: ऐसे समय में जब कई कंपनियां कई कारणों से दिवालिया या बंद हो रही हैं या डाउनट्रेंड का सामना कर रही हैं ऐसे में EPF योजना के तहत आने वाले लाखों कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ावा देने के सरकार ऐसा कर रही है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 5, 2019 5:01 PM
कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 कानून में और अधिक स्पष्टता लाने के लिए सरकार कुछ नियमों में संसोधन की तैयारी में है।(सांकेतिक तस्वीर)

EPFO, EPFO Latest News: कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 कानून में और अधिक स्पष्टता लाने के लिए सरकार कुछ नियमों में संसोधन की तैयारी में है। पीएफ के भुगतान को मजबूत बनाने के लिए सरकार यह कदम उठाने जा रही है। ऐसे समय में जब कई कंपनियां कई कारणों से दिवालिया या बंद हो रही हैं या डाउनट्रेंड का सामना कर रही हैं ऐसे में EPF योजना के तहत आने वाले लाखों कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ावा देने के सरकार ऐसा कर रही है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सरकार ने ‘The Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions (Amendment) Bill, 2019 ड्राफ्ट को चर्चा के लिए रखा है। इस ड्राफ्ट में ईपीएफ अधिनियम की धारा 11 में संशोधन करने का प्रस्ताव है। जिसमें अन्य ऋणों के भुगतान की जगह योगदान (Contribution) के भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी। इस ड्राफ्ट में पीएफ की ओर भुगतान से बचने की कोशिश कर रही कंपनियों के लिए जुर्माना बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा इस ड्राफ्ट में ग्राहक को कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) पर स्विच करने का विकल्प मिलेगा।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना के तहत, नियोक्ता (Employer) कर्मचारी के मूल वेतन का न्यूनतम 12 प्रतिशत और EPF और EPS की ओर DA का योगदान देता है। इसमें से 8.33 फीसदी ईपीएस की ओर जाता है। कर्मचारी ईपीएफ के लिए मूल और डीए का 12 प्रतिशत योगदान देता है। सरकार ने कर्मचारी के योगदान को 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया है।

गौरतलब है कि सरकार ने इस साल जुलाई में लोकसभा में कहा था कि पूरे भारत में लगभग 6.8 लाख कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इनमें से 1.42 लाख से अधिक महाराष्ट्र में, 1.25 लाख से अधिक दिल्ली में, 67,000 से अधिक पश्चिम बंगाल की कंपनियां थी। सरकार ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिन्होंने अपने वार्षिक वित्तीय विवरण, या रिटर्न दाखिल नहीं किया है।

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