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अगर चाहते हैं अगली सैलरी कट कर न आए तो तैयार रखें ये कागजात!

अगर किन्हीं कारणों से आप ये दस्तावेज नहीं जमा करेंगे तो आपकी अगले मासिक वेतन में कुछ हिस्सा काटा जा सकता है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

अगर आपकी तनख्वाह आयकर के दायरे में आती है और चाहते हैं कि अगली सैलरी कट कर न आए तो निवेश से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रख लें। दरअसल, जनवरी से मार्च के बीच कंपनियां अपने कर्मचारियों से निवेश संबंधी प्रूफ की प्रतियां मांगती हैं, ताकि वे उनकी तनख्वाह पर टीडीएस का हिसाब-किताब कर सकें।

अगर किन्हीं कारणों से आप ये दस्तावेज नहीं जमा करेंगे तो आपकी अगले मासिक वेतन में कुछ हिस्सा काटा जा सकता है। आइए जानते हैं क्यों और कौन से वे दस्तावेज हैं, जो आपको तैयार रखने चाहिए।

– कंपनियों को हर साल आयकर विभाग को अपने कर्मचारियों का निवेश (टैक्स सेविंग वाला) संबंधी ब्यौरा जमा करना पड़ता है।

– कंपनियां इसी के लिए कर्मियों से निवेश संबंधी प्रूफ मांगती हैं, जो वे इनवेस्टमेंट प्लान के तहत जून-जुलाई में जमा करते हैं।

– कर्मचारियों द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेजों और जानकारियों के आधार पर कंपनियां टीडीएस का आकलन करती हैं।

– टैक्स सेविंग डॉक्यूमेंट्स के तौर पर कर्मचारी को एलआईसी प्लान, एनपीएस, सेविंग स्कीम, ईएलएस और पीपीएफ समेत निवेश से जुड़े कागज की प्रतियां लगानी पड़ती हैं।

– अगर कर्मचारी किराए के मकान में रहता है तो उसे मकान किराया रसीद भी जमा करनी पड़ेगी।

– अगर किसी ने हाल-फिलहाल में लोन लेकर घर खरीदा हो, तब वह होम लोन से जुड़े दस्तावेज भी जमा कर सकता है।

तनख्वाह से अधिक कट गया है TDS, तब क्या करें?: कंपनी ने तनख्वाह में अगर टीडीएस के नाम पर अधिक रकम काट ली है, तब उसे रिफंड कराया जा सकता है। यह काम करने में आयकर विभाग की मदद ली जाती है। दरअसल, अधिक टीडीएस तब कटता है, जब लोग निवेश से संबंधित दस्तावेज समय रहते नहीं जमा कराते हैं। टैक्स का रिफंड संबंधित वित्त वर्ष के दो साल के भीतर क्लेम करवाना होता है, जिसमें पैसे कटे होते हैं।

यहां पता करें कि कितना कटा करः जानकारों के मुताबिक, फॉर्म 26 एएस में पैन संख्या के जरिए पता लग जाता है कि किस शख्स ने किस साल में कितना कर चुकाया। incometaxindiaefiling.gov.in पर ये फॉर्म चेक किया जा सकती है, पर उसके लिए लॉग इन करना पड़ता है। हालांकि, टैक्स फाइलिंग में गड़बड़ी के चलते रिफंड में दिक्कत भी आ सकती है।

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