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सैलरी में कट रही है ग्रैच्युटी? 5 साल सर्विस से पहले भी मिल सकता है भुगतान, जान लें पूरे नियम

नियोक्ता अपने कर्मचारी को कितने प्रतिशत ग्रैच्युटी देगा, इसका कानून के द्वारा कोई भी प्रतिशत तय नहीं किया गया है। लेकिन ये माना जाता है कि नियोक्ता एक फॉर्मूले के आधार पर ग्रैच्युटी की रकम तय कर सकते हैं या फिर उससे ज्यादा भी दे सकते हैं।

Author October 22, 2018 3:19 PM
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

ग्रैच्युटी किसी नियोक्ता के द्वारा अपने कर्मचारी को उसके सेवा अवधि के दौरान की गई सेवाओं के बदले में दी जाती है। आमतौर पर ये सेवानिवृत्ति के दौरान ही दी जाती है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में ये पहले भी दी जा सकती है। कोई व्यक्ति ग्रैच्युटी पाने का हकदार तभी हो सकता है जब वह कम से कम पांच साल की अवधि संगठन के साथ पूरी कर ले। हालांकि, इसे पांच साल पूरा होने से पहले भी कर्मचारी को दिया जा सकता है। लेकिन इसमें शर्त ये है कि या तो कर्मचारी की मृत्यु हो गई हो या फिर वह किसी हादसे या बीमारी के कारण अक्षम हो गया हो।

वैसे नियोक्ता अपने कर्मचारी को कितने प्रतिशत ग्रैच्युटी देगा, इसका कानून के द्वारा कोई भी प्रतिशत तय नहीं किया गया है। लेकिन ये माना जाता है कि नियोक्ता एक फॉर्मूले के आधार पर ग्रैच्युटी की रकम तय कर सकते हैं या फिर उससे ज्यादा भी दे सकते हैं। ग्रैच्युटी कितनी देनी है, इसके दो महत्वपूर्ण पक्ष होते हैं। पहला आखिरी वेतन और सेवा काल। ये आंकलन करने के लिए कि कितनी ग्रैच्युटी दी जाएगी, ग्रैच्युटी भुगतान कानून, 1972 गैर सरकारी कर्मचारियों को दो श्रेणियों में बांटता है।

1. कर्मचारी, जो एक्ट के अर्न्तगत आते हैं।
2. कर्मचारी, जो एक्ट के अर्न्तगत नहीं आते हैं।

कोई कर्मचारी एक्ट के अर्न्तगत आएगा यदि उसके संगठन में 12 महीने किसी एक दिन में कम से कम 10 कर्मचारी काम करते हों। इसके अलावा यदि संगठन एक बार ग्रैच्युटी एक्ट के तहत आ गया तो वह हमेशा ही उसमें बना रहेगा, फिर चाहें उसके कर्मचारियों की संख्या 10 से कम ही क्यों न हो जाए?

ग्रैच्युटी का आंकलन: 

1. कर्मचारी, जो एक्ट के तहत आते हैं : ग्रैच्युटी के तहत दी जाने वाली रकम क्या होगी? इस रकम को तय करने का एक सूत्र है। ये सूत्र सेवा काल के हर साल के अंतिम 15 दिनों में लिए गए वेतन या फिर छह महीने से अधिक या उसके भाग पर आधारित होता है।

सूत्र: (15 X आखिरी वेतन X सेवाकाल) ÷ 26

यहां पर आखिरी वेतन का अर्थ मूल वेतन, महंगाई भत्ता और सेल्स पर मिले कमिशन से है।

मान लीजिए, किसी शख्स का आखिरी मूल वेतन 60,000 प्रति माह हो और उसने किसी कंपनी में 20 साल 7 महीने तक काम किया हो। इस मामले में इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हुए ग्रैच्युटी का आंकलन इस तरह किया जाएगा।

(15 X 60,000 X 21)/26 = Rs. 7.26 लाख रुपये

इस मामले में, सेवा काल को 21 वर्ष माना गया है क्यूंकि शख्स ने एक साल में 6 माह से ज्यादा काम किया है। अगर वह शख्स 20 साल 5 माह काम करता तो इस परिस्थिति में उसके ग्रैच्युटी खाते में सिर्फ 20 साल का ही पैसा जोड़ा जाता।

2. कर्मचारी, जो एक्ट के तहत नहीं आते: ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी नियोक्ता को अपने कर्मचारी को ग्रैच्युटी का भुगतान करने से रोकता हो, फिर चाहें उसकी कंपनी एक्ट के दायरे में आती हो या न आती हो। कर्मचारी को दी जाने वाली ग्रैच्युटी की राशि पूरे होने वाले साल में आधे महीने के वेतन की गणना पर आधारित होती है। यहां पर वेतन में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और सेल्स पर मिलने वाला कमिशन शामिल होता है।

सूत्र: (15 X आखिरी वेतन X सेवाकाल) ÷ 30

इस उदाहरण में किसी शख्स का संगठन ग्रैच्युटी एक्ट, 1972 के दायरे में नहीं आता हो तो ग्रैच्युटी की गणना इस प्रकार होगी।

(15 X 60,000 X 20) /30 = 6 लाख रुपये

यहां पर सेवाकाल के साल की गणना पूरे होने वाले हर साल के आधार पर की गई है। इसलिए, चूंकि शख्स कंपनी के साथ 20 साल और 7 महीने तक काम कर चुका है, इसलिए उसकी सेवा अवधि को 20 वर्ष ही माना जाएगा, 21 वर्ष नहीं।

पेंशनर ग्रैच्युटी की गणना: भारत सरकार के द्वारा पेंशन पाने वालों के लिए बनाए गए वेबसाइट पोर्टल के अनुसार रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की गणना इस आधार पर होगी। महीने के मूल वेतन का चौथाई + रिटायरमेंट से पहले लिया गया महंगाई भत्ता जिसकी गणना सेवाकाल के छमाही आधार पर होगी। रिटायर होने पर मिलने वाली मूल वेतन का 16 गुना या अधिकतम 20 लाख रुपये हो सकती है। लेकिन किसी कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में, ग्रैच्युटी सेवा काल की अवधि पर आधारित होगी। लेकिन यहां भी अधिकतम राशि 20 लाख रुपये ही हो सकती है।

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