MP में टीका नहीं तो राशन नहीं, दिल्ली में शिक्षा निदेशालय बोला- एग्जाम के बीच न करें अनाज वितरण; बंगाल में “दुआरे राशन” का आगाज

बंगाल में दो दर्जन जिलों में फैले करीब 300 राशन डीलरों के संघ ने सीएम के “दुआरे राशन” या राशन की डोरस्टेप डिलीवरी प्रोग्राम का कोलकाता के नेताजी इन्डोर स्टेडियम में बहिष्कार किया।

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राशन कार्ड डिपो से अनाज ले जाते हुए लाभार्थी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित मध्य प्रदेश में राशन लेने के लिए अब कोरोना वायरस से जुड़ा टीका लगवाना अनिवार्य होगा। सूबे के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से इस बाबत सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों और अफसरों से एक पत्र के जरिए कहा गया है कि लाभार्थियों को बताया जाए कि राशन पाने के लिए टीके की दोनों खुराक लगवाना जरूरी है। नहीं तो वे उचित कार्रवाई करें।

आठ नवंबर, 2021 को इस संबंध में विभाग की ओर से ये बातें इस चिट्ठी के मार्फत कही गईं। यह रहा पत्रः

‘बोर्ड परीक्षा के दौरान न करें राशन वितरण’: उधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12 की टर्म-1 परीक्षाओं की मंगलवार को शुरुआत होने के साथ ही दिल्ली के शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को एक परिपत्र जारी किया। कहा गया कि परीक्षा के दौरान राशन वितरण तथा टीकाकरण जैसी गतिविधियां आयोजित नहीं की जाएं।

‘माइनर’ विषयों के लिए सीबीएसई की कक्षा 12 और 10 की परीक्षाएं क्रमशः 16 और 17 नवंबर से शुरू हो रही हैं। ‘मेजर’ विषयों के लिए कक्षा 10 की परीक्षा 30 नवंबर तथा कक्षा 12 की परीक्षा एक दिसंबर से शुरू होगी। कक्षा नौ और 11 की मध्यावधि परीक्षाएं भी एक दिसंबर से होने वाली हैं। उक्त परीक्षाएं ‘ऑफलाइन’ माध्यम से आयोजित की जाएंगी।

बंगाल में ‘दुआरे राशन’ की शुरुआत: उधर, पश्चिम बंगाल में मंगलवार को सीएम और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने दुआरे राशन (राशन की डोर स्टेप डिलीवरी) का ऐलान किया। दीदी ने इसका वादा विधानसभा चुनाव से पहले किया था, जबकि इसका आगाज पूरे सूबे में 16 नवंबर से ही हुआ। दीदी की इस स्कीम के तहत लाभार्थी घर पर ही राशन पा सकेंगे। हालांकि, इस योजना से 300 राशन डीलर नाखुश हैं और उन्होंने इवेंट का बहिष्कार करने का फैसला लिया था।

राज्य सरकार ने इससे पहले सितंबर से राज्य में लगभग 3,000 राशन डीलरों के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। दरअसल, ममता सरकार इसके जरिए यह पता लगाना चाहती थी कि यह योजना जमीनी स्तर पर कैसे काम करती है। अधिकारियों ने कहा कि ममता ने पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद पूरे राज्य के लिए इस परियोजना की घोषणा की।

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