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हल्के से लेकर गंभीर लक्षणों में कैसे हो Covid-19 रोगियों की देखभाल और इलाज? पढ़ें केंद्र की ताजा गाइडलाइन

इस बीच, देश में एक दिन में कोविड-19 के 2,38,018 नए मामले सामने आने के बाद भारत में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,76,18,271 हो गई।

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नई दिल्ली में सीडब्ल्यूजी विलेज में बने कोविड केयर सेंटर में ड्यूटी के दौरान हेल्थ वर्कर्स। (फोटोः पीटीआई)

Coronavirus Crisis in India: वयस्क कोरोना रोगियों के प्रबंधन के लिए संशोधित क्लीनिकल गाइडेंस जारी किया है। इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)/आईसीएमआर (ICMR)-कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स (Covid19 National Task Force)/संयुक्त निगरानी समूह के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इशु किया है।

14 जनवरी, 2022 को संशोधित इस क्लीनिकल गाइडेंस मुताबिक, हल्के लक्षणों के मामले में होम आइसोलेशन में रहने वालों को दो गज की दूरी, घर के भीतर मास्क का प्रयोग और साफ-सफाई का खास ख्याल रखना होगा। साथ ही फिजिशियन से सलाह मशविरा करते रहें और बीच-बीच में अपना तापमान और ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें। अगर सांस लेने में तकलीफ हो और तेज बुखार या कफ हो और वह पांच दिन तक परेशान करे तब डॉक्टर के पास पहुंचें।

जिनमें कोरोना के मॉडरेट लक्षण हैं और वे हॉस्पिटल वॉर्ड में भर्ती हैं, तब टार्गेट एसपीओ2 92 से 96 फीसदी होना चाहिए। ऑक्सिजेनेशन के लिए जिस डिवासइस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, वह नॉन-रीब्रीथिंग (जिससे दोबारा सांस न ली जा सके) फेस मास्क होना चाहिए। ऐसे मरीजों में जिन चीजों पर खासा नजर रखनी चाहिए, उनमें ब्रीथिंग रेट (सांस लेने वाली दर), हीमोडायनैमिक इनस्टेबिलिटी, ऑक्सीजन की जरूरत में आने वाला उतार-चढ़ाव आदि है। साथ ही सीरियल सीएक्सआर, सीआरपी, डी-डिमर, ब्लड शुगर 48 से 72 घंटे में, सीबीसी, केएफटी, एलएफटी 24 से 48 घंटे के हिसाब से होना चाहिए।

गंभीर मामलों के तहत आईसीयू/एचडीयू में भर्ती उन कोरोना मरीजों के मामले में एनआईवी (हेल्मेट या फेस मास्क इंटरफेस- उपलब्धता के आधार पर) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिन्हें अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने वाली हो। एचएफएनसी के प्रयोग पर भी विचार किया जा सकता है। गाइडलाइन के मुताबिक, एवोलेमा को बरकरार रखना चाहिए, जबकि सेप्टिक शॉक (अगर जरूरत हो तो) को मौजूदा प्रोटोकॉल और लोकल एंटीबायोग्राम के तहत किया जाना चाहिए।

ऐसे मामलों में सांस, हीमोडायनैमिक इनस्टेबिलिटी, ऑक्सीजन की जरूरत में होने वाला फेरबदल, सीरियल सीएक्सआर (अगर स्थिति बिगड़े तभी एचआरसीटी सीने का कराया जाए), लैब मॉनिटरिंग (सीआरपी, डी-डायमर, ब्लड शुगर 48 से 72 घंटे के हिसाब से; केएफटी, एलएफटी 24 से 48 घंटे के हिसाब से होनी चाहिए) पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इलाज के बाद मरीज को संशोधित डिस्चार्ज क्राइटेरिया के तहत किया जाना है।

क्लीनिकल गाइंडेंस का पूरा ब्यौरा यही है।

किन्हें है सर्वाधिक खतरा?: कोरोना वायरस से गंभीर बीमारी और यहां तक कि जान जाने तक का सबसे अधिक खतरा 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों, कार्डियोवस्कुलर बीमारियों, हायपरटेंशन, सीएडी, मधुमेह, एक्टिव ट्यूबरक्लॉसिस, क्रोनिक बीमारियां (लंग/किडनी/लिवर), मोटापा और सेरेब्रोवस्कुलर बीमारियों से पीड़ित लोगों को है।

230 दिन में कोरोना के सर्वाधिक उपचाराधीन मरीजः इस बीच, देश में एक दिन में कोविड-19 के 2,38,018 नए मामले सामने आने के बाद भारत में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,76,18,271 हो गई। संक्रमण के कुल मामलों में कोरोना वायरस के ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप के 8,891 मामले भी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार (सुबह आठ बजे तक के) के आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 17,36,628 हो गई है, जो कुल मामलों का 4.62 प्रतिशत है।

देश में 230 दिन में उपचाराधीन मरीजों की यह संख्या सर्वाधिक है। बीते 24 घंटों में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 80,287 की वृद्धि दर्ज की गयी। वहीं, 310 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,86,761 हो गई। देश में मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर घटकर 94.09 प्रतिशत हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि देश में सोमवार से ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप के मामलों में 8.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हरेक संक्रमित के नमूनों का जीनोम अनुक्रमण मुमकिन नहीं है, लेकिन इस मौजूदा लहर में अधिकतर मामले ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप के ही हैं। आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 14.43 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 14.92 प्रतिशत दर्ज की गई। देश में अभी तक कुल 3,53,94,882 लोग संक्रमणमुक्त हो चुके हैं और कोविड-19 से मृत्यु दर 1.29 प्रतिशत है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 158.04 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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