बदल रहा है ऑटोमोबाइल बाजार, क्या आपको अभी खरीदनी चाहिए इलेक्ट्रिक कार? जानिए- Electric Vehicle के फायदे और नुकसान

पेट्रोल-डीजल वाहन की अपेक्षा इलेक्ट्रिक व्हीकल काफी सस्ता पड़ता है। क्योंकि इलेक्ट्रिक व्हीकल को चार्ज के लिए बिजली की जरूरत होती है और घरेलू बिजली 8 से 10 रुपये प्रति यूनिट मिलती है। जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 रुपये के आसपास है।

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सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर सब्सिडी दी जा रही है। (फाइल फोटो)

फेस्टिव सीजन की शुरुआत से लेकर नए साल तक ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए वाहन खरीदने पर डिस्काउंट ऑफर किया जाता है। जिसमें सबसे ज्यादा बेनिफिट्स कार कंपनियों के द्वारा कस्टमर को ऑफर किए जाते हैं। वहीं दूसरी ओर आपने दिल्ली-एनसीआर सहित देश के बड़े शहरों में प्रदूषण की खबरें सुनी होगी। जिसके बाद अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं। तो सोचते होंगे कि, क्या पेट्रोल-डीजल कार की जगह इलेक्ट्रिक कार खरीदी जाए। ऐसे में कई दूसरे सवाल भी आपके मन में आते होंगे। जिसमें इलेक्ट्रिक कार कितनी रेंज देती है, क्या इलेक्ट्रिक कार के हिसाब से देश में इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है साथ ही सरकार आखिर कब तक इलेक्ट्रिक वाहन पर सब्सिडी जारी रखेगी। ऐसे में हम आपके इन सभी सवालों के जवाब लेकर आए हैं। आइए जानते हैं इलेक्ट्रिक कार से जुड़े हर सवाल का जवाब।

Electric व्हीकल की संभावनाएं- सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही मिलकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर जोर दें रही हैं। वहीं सरकार की योजना है कि, 2025-26 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 12 फीसदी तक हो जाए। आपको बता दें वर्तमान में साल 2020 में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 361.78 फीसदी बढ़ी है।

Electric व्हीकल के फायदें- पेट्रोल-डीजल वाहन की अपेक्षा इलेक्ट्रिक व्हीकल काफी सस्ता पड़ता है। क्योंकि इलेक्ट्रिक व्हीकल को चार्ज के लिए बिजली की जरूरत होती है और घरेलू बिजली 8 से 10 रुपये प्रति यूनिट मिलती है। जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 रुपये के आसपास है। उदाहरण के लिए समझिये अगर आपको दिल्ली में रोज 30 किमी का सफर करना है तो पेट्रोल कार से महीने का 5,375 रुपये खर्च आएगा। जबकि 30.2kWh बैटरी वाली कार जो 312 किमी की रेंज देती है से हर महीने कुल 697 रुपये खर्च आएगा।

Electric Car का मेंटेनेंस – पेट्रोल-डीजल कार की अपेक्षा इलेक्ट्रिक कार का मेंटेनेंस काफी कम पड़ता है। टाटा मोटर्स के अनुसार इलेक्ट्रिक कार पर 5 साल में करीब 25 हजार रुपये मेंटेनेंस पर खर्च होते हैं। जबकि पेट्रोल-डीजल कार पर सालाना 7 से 10 हजार रुपये खर्च आ सकता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल-डीजन वाली कारों की तुलना में काफी सस्ती पड़ती हैं।

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EV क्लीन एनवायरमेंट – बिजली उत्पादन में अगर कोयला और जीवाश्म ईंधन यूज होता है। तो इलेक्ट्रिक कार भी कार्बन उत्सर्जन में सहायक होती है। लेकिन इलेक्ट्रिक कार से किसी तरह का वायु प्रदूषण नहीं होता है। जबकि पेट्रोल-डीजल कार से बहुत ज्यादा मात्रा में वायु प्रदूषण होता है। वहीं कार्बन उत्सर्जन की बात करें तो सरकार परमाणु ईंधन से बिजली उत्पादन करने पर जोर दे रही है। इसके अलावा कई राज्यों में इलेक्ट्रिक व्हीकल के रजिस्ट्रेशन में छूट भी मिलती है।

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