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लाइफ इंश्योरेंस लेकर भी पड़ सकता है पछताना, इन 10 कारणों से रिजेक्ट हो सकता है क्लेम

लाइफ इंश्योरेंस यानी जीवन बीमा पॉलिसी लेने से पहले यह जानना अच्छा रहेगा कि किन कारणों से क्लेम खारिज हो किया जा सकता है। 1. आत्महत्या के मामले में: इंश्योरेंस के प्रकार पर निर्भर करता है कि नॉमिनी को कितना क्लेम मिलेगा। लिंक्ड प्लान के मामले में पॉलिसी होल्डर बीमा शुरू होने से 12 महीने के भीतर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है तो नॉमिनी को पॉलिसी फंड वेल्यू का 100 फीसदी मिलेगा। नॉन लिंक्ड प्लान के मामले में...

जीवन बीमा कराने से पहले ये कारण जान लेने ठीक रहेगा। (फोटो सोर्स- pixabay)

लाइफ इंश्योरेंस यानी जीवन बीमा पॉलिसी लेने से पहले यह जानना अच्छा रहेगा कि किन कारणों से क्लेम खारिज हो किया जा सकता है। 1. आत्महत्या के मामले में: इंश्योरेंस के प्रकार पर निर्भर करता है कि नॉमिनी को कितना क्लेम मिलेगा। लिंक्ड प्लान के मामले में पॉलिसी होल्डर बीमा शुरू होने से 12 महीने के भीतर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है तो नॉमिनी को पॉलिसी फंड वेल्यू का 100 फीसदी मिलेगा। नॉन लिंक्ड प्लान के मामले में ऐसी परिस्थिति बनती है तो नॉमिनी को पूरा इंश्योरेंस कवर नहीं मिलेगा, बल्कि जमा किए गए प्रीमियम का 80 फीसदी ही मिलेगा। 2014 तक यह नियम था कि अगर बीमा के शुरू होने के साल भर के भीतर पॉलिसी होल्डर खुदकुशी कर लेता था तो नॉमिनी को कोई क्लेम नहीं मिलता था। 2. गलत सूचना देने पर: अगर आप इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के वक्त गलत सूचनाएं जैसे कि मेडीकल हिस्ट्री की गलत जानकारी मुहैया कराते हैं तो क्लेम खारिज हो सकता है।

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3. पॉलिसी लेने के बाद सिगरेट पीने पर: सिगरेट पीने वालों के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम बिना सिगरेट वालों से ज्यादा होता है। अगर पॉलिसी खरीदने के बाद पॉलिसी होल्डर सिगरेट पीना शुरू कर देता है तो इस बात की जानकारी उसे इंश्योरेंस कंपनी को देनी होती है। ऐसा करने पर प्रीमियम बढ़ाया जा सकता है। अगर बीमा लेने वाला व्यक्ति अपनी सेहत से जुड़ी बदली हुई लतों के बारे में सूचना नहीं देता है और प्राण घातक बीमारियां पाल लेता है तो कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। 4. शराब पीकर और ड्रग्स लेकर गाड़ी चलाने पर: इश्योरेंस कंपनी को यह जानकारी लगती है कि पॉलिसी होल्डर शराब या ड्रग्स की लत में गाड़ी चला रहा था, जो कि मौत का कारण हो सकता है तो ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम खाजिर करने का अधिकार कंपनी को प्राप्त है।

5. कानून तोड़ने पर: अगर पॉलिसी होल्डर की मौत का कारण कानून का उल्लंघन या अपराध में शामिल होना पाया जाता है तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। 6. भारत के बाहर मौत के मामले में: इंश्योरेंस पॉलिसी के एक क्लॉज के मुताबिक अगर पॉलिसी होल्डर विदेश में रहने की योजना बनाता है तो उसे इसकी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को देनी होती है। ऐसा नहीं करने पर क्लेम खारिज हो सकता है। टर्म इंश्योरेंस प्लान्स तब भी काम करते हैं जब आप किसी दूसरे देश में रहने लगते हैं।

7. आतंकवादी हमले में मौत के मामले में: ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां आतंकवादी हमले में मौत होने पर कोई क्लेम नहीं देती है। ऐसे मामले में नॉमिनी अगर बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से गुहार लगाता है तो मानवीय पहलू के आधार पर कंपनी क्लेम दे भी सकती है, लेकिन ऐसा कम ही होता है। 8. प्राकृतिक आपदा के मामले में: अगर भूकंप, बाढ़ या सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मौत होती है तो इंश्योरेंस कंपनियां बेसिक इंश्योरेंस प्लान में इसे कवर नहीं करती हैं। हालांकि आप ऐसी प्राकृतिक आपदाओं को कवर करने के लिए एड-ऑन प्लान चुन सकते हैं।

9. रोमांचक खेल के मामले में: बंजी जंपिंग, स्काईडाइविंग, पावर बोट रेसिंग जैसे रोमांचक खेलों में शामिल होने पर मौत हो जाती है तो नॉमिनी को कोई क्लेम नहीं मिलता है। कार रेसिंग और बाइक रेसिंग के मामले में भी यही नियम लागू है। 10. हत्या के मामले में: पॉलिसी होल्डर की हत्या के मामले में अगर इंश्योरेंस कंपनी को पता चलता है कि नॉमिनी आरोपी है तो वह क्लेम खारिज कर सकती है या तब तक लटका सकती है जब तक कि नॉमिनी को आरोपमुक्त या बरी नहीं कर दिया जाता है।

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