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बैंक ऑफ बड़ौदा में है आपका खाता तो जान लीजिए ये बात, नहीं तो कट जाएंगे अकाउंट से रुपए

बैंक ऑफ बड़ौदा ने मेट्रो, शहरी और अर्ध-शहरी शाखाओं में मिनिमम क्वार्टरली एवरेज बैलेंस को दोगुना कर दिया है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बैंकों के खातों के लिए किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express File Photo)

बैंक के बचत खातों में एक निश्चित रकम जमा रखनी होती है, जिसे क्वार्टरली एवरेज बैलेंस (क्यूएबी) कहते हैं। यह निश्चित रकम खाते में जमा नहीं रहने पर बैंक खाताधारक से जुर्माना वसूलते हैं। बैंक के खाते में कितनी औसत रकम जमा रहनी चाहिए, यह बैंक और उसके स्थान पर निर्भर करता है। सभी बैंकों में यह रकम अलग-अलग होती है। बैंक ऑफ बड़ौदा में भी खाताधारकों को यह रकम जमा रखनी होती है। हालांकि, यह बैंक अब खातों में न्यूनतम जमा की राशि को बढ़ाने वाली है। 5 जनवरी 2019 को किए एक ट्वीट में बताया गया, “1 फरवरी 2019 से बैंक ऑफ बड़ौदा के बचत खातों में मिनिमम क्वार्टरली एवरेज बैलेंस बदल जाएगा।”

बैंक ऑफ बड़ौदा ने मेट्रो, शहरी और अर्ध-शहरी शाखाओं में मिनिमम क्वार्टरली एवरेज बैलेंस को दोगुना कर दिया है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बैंकों के खातों के लिए किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। मेट्रो व शहरी क्षेत्र में स्थित शाखाओं के खातों में पहले न्यूनतम राशि 1000 रुपये रखनी होती थी, जिसे बढ़ाकर अब 2000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, अर्ध-शहरी क्षेत्रोंं में यह राशि 500 से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दी गई है।

बता दें कि इस महीने की शुरूआ में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों के विलय का रास्ता साफ कर दिया। मंत्रिमंडल ने देना बैंक और विजया बैंक को सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) में मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस विलय के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक अस्तित्व में आएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी मंत्रिमंडल की बैठक में विलय को मंजूरी दी गई। फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ” इस विलय से इन बैंकों के कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और विलय के बाद कोई छटनी भी नहीं होगी।” इन तीनों बैंकों के निदेशक मंडलों ने प्रस्तावित विलय के लिए शेयरों की अदला-बदली की दरों को अंतिम रूप दे दिया है।

विलय की योजना के मुताबिक, विजया बैंक के शेयरधारकों को इस बैंक के प्रत्येक 1,000 शेयरों के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 402 इक्विटी शेयर मिलेंगे। वहीं देना बैंक के मामले में, उसके शेयरधारकों को प्रत्येक 1,000 शेयर के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 110 शेयर मिलेंगे। यह योजना एक अप्रैल, 2019 से अस्तित्व में आएगी। विलय के फलस्वरूप बैंक आफ बड़ौदा सरकारी क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। विलय के बाद अस्तित्व में आए बैंक का कुल कारोबार 14.82 लाख करोड़ रुपये होगा। विलय के बाद देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 18 रह जाएगी। (एजेंसी इनपुट के साथ)

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