Indian Railways IRCTC की ये सारी गाड़ियां लौटीं पुराने शेड्यूल पर, 30% टिकट भी होगा सस्ता

यह 44 ट्रेनें पहले की तरह ही अपने पुराने शेड्यूल पर चलेंगी, न तो इनके कोच को बढ़ाया जाएगा और न ही कम किया जाएगा। कोरोन काल के दौरान यह हॉलीडे स्‍पेशन के नाम से चल रही थीं। सबसे खास बात है कि इन ट्रेनों के किराये में 30 प्रतिशत की गिरावट होगी

Indian Railways IRCTC की ये सारी गाड़ियां लौटीं पुराने शेड्यूल पर, 30% टिकट भी होगा सस्ता (File Photo)

भारतीय रेलवे ने 44 ट्रेनों से स्‍पेशल का टैग हटा दिया है। यह 44 ट्रेनें पहले की तरह ही अपने पुराने शेड्यूल पर चलेंगी, न तो इनके कोच को बढ़ाया जाएगा और न ही कम किया जाएगा। कोरोन काल के दौरान यह हॉलीडे स्‍पेशन के नाम से चल रही थीं। सबसे खास बात है कि इन ट्रेनों के किराये में 30 प्रतिशत की गिरावट होगी, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

पूर्वोत्‍तर की ओर चलने वाली पुणे – लखनऊ, आगरा इंटरसिटी, एलटीटी एक्‍सप्रेसवे, झांसी इंटरसिटी समेत 44 ट्रेनों से स्‍पेशल का टैग हटा दिया गया है। इससे किराये की रकम में 30 प्रतिशत की कमी आएगी। इन ट्रेनों के फेरों में भी कोई कमी नहीं आएगी। यह ट्रेनें आज यानी सोमवार से अपने निर्धारित समय पर ही संचालित की जाएंगी। इसके चलाने में न तो समय का कोई बदलाव किया गया है और न ही इसकी कोई स्थिति में ही परिवर्तन किया गया है। लेकिन फिर भी यात्रियों यह जानकारी दी ई है कि वह घर से निकलने से पूर्व अपने ट्र्रेन की स्थिति की जांच कर लें।

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स्‍पेशल के नाम पर कितना वसूला जा रहा किराया
बता दें कि कोरोना काल के दौरान समान्‍य ट्रेनों को स्‍पेशल ट्रेन करके चलाया जा रहा था। इन ट्रेनों का किराया बढ़ा दिया गया था और कई सुविधाएं भी कम कर दी गईं थी। स्लीपर क्लास में ढाई सौ के करीब, थर्ड एसी में सामान्य दर से 550 और सेकंड एसी में 750 रुपये तक अधिक किराया यात्रियों से वसूला जा रहा है। हालाकि यह किराया दूरी के हिसाब से तय किया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने कुछ दिन पहले ही ट्रेनों से स्‍पेशल का टैग हटाने के लिए कहा था। जिसके बाद 44 पूर्वोत्‍तर की ओर चने वाली ट्रेनों से स्‍पेशन टैग हटाया जा रहा है।

यह सुविधा पहले मिलती थी
पहले ट्रेन में एसी क्लास में बेडरोल और साथ ही खाने का इंतजाम किया जाता था। पर्दे भी लगे रहते थे। लेकिन अब ट्रेन में सफर करने से पहले बेडशीट और कंबल साथ ही खाने का प्रबंध खुद से करना होता है। जहां कीमतें घटाने की जरूरत थी, वहीं रेलवे स्पेशल ट्रेन का नाम देकर भाड़ा यात्रियों से अधिक वसूल रहा है।

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