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राशन कार्ड बनाने के सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रही मोदी सरकार! फर्जीवाड़े पर कसेगी लगाम

देश में लगभग 23.30 करोड़ राशन कार्ड हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार नंबर के साथ जोड़ा गया है।

Author Updated: October 12, 2019 8:23 PM
राशन कार्ड बनाने के सिस्टम में बदलाव किया जा रहा है। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

केंद्र की मोदी सरकार राशन कार्ड में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए इसके बनाने की सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रही है। फर्जी नाम को चेक करने के लिए राशन कार्ड को आधार संख्या (AADHAAR) से लिंक कराने के बाद, केंद्र सरकार एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रही है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नए राशन कार्ड राष्ट्रीय स्तर के ‘डी-डुप्लीकेशन’ चेक के बाद ही जारी किए जाएं। ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) में धांधली को रोकने के उद्देश्य से यह पहल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा अमल में लाई गई है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव रविकांत ने बताया, “एक बार प्रस्तावित प्रणाली चालू हो जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर डुप्लीकेशन जाँच के बाद ही नए राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। वर्तमान में कुछ राज्यों में उनके अधिकार क्षेत्र के भीतर ‘डी-डुप्लीकेशन’ जांच की जा रही है। हम अगले साल तक इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना बना रहे हैं।” उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “हमने राज्यों को राशन कार्ड डाटा साझा करने के लिए कहा है। उनमें से कुछ पहले से ही जरूरी विवरण साझा कर चुके हैं। हम इस डाटा को राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस में एकत्रित करेंगे। इसको एक साल के भीतर पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। यह पूरा हो जाने के बाद, राशन कार्ड के प्रत्येक नए आवेदन को डी-डुप्लीकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। नए राशन कार्ड आधार-सत्यापित होंगे और प्रस्तावित प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि नए आवेदक के नाम और पते में कोई मौजूदा राशन कार्ड न हो।”

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यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहले सरकार का ध्यान लाभार्थियों के आधार के साथ जोड़कर फर्जी राशन को हटाने पर था। देश में लगभग 23.30 करोड़ राशन कार्ड हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार नंबर के साथ जोड़ा गया है। मंत्रालय के अनुसार, डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप, 2013 और 2018 के बीच राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 2.98 करोड़ राशन कार्ड हटाए गए या रद्द किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप पीडीएस में खामी और धांधली कम हो गई है।

वर्तमान में, 75 प्रतिशत ग्रामीण और 50 प्रतिशत शहरी आबादी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत शामिल है। इस अनुपात के आधार पर एनएफएसए के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए पात्र व्यक्तियों की संख्या 81.35 करोड़ है। इसमें से 79.66 करोड़ रुपये की पहचान 3 सितंबर, 2019 को लाभार्थियों के रूप में की गई। अभी भी 1.69 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें एनएफएसए का लाभ उठाने और नए राशन कार्ड प्राप्त करने की आवश्यकता है।

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