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7th Pay Commission: इन सरकारी कर्मचारियों ने काम में बरती ढील तो हो सकते हैं जबरन रिटायर, कमेटी गठित

7th Pay Commission, 7th CPC Latest News, Bihar Government Employees: 50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए तैयारी इस पॉलिसी के तहत दो कमेटियों का गठन किया है, जिसमें एक कमेटी में तीन सदस्य और एक कमेटी में चार सदस्य हैं।

(फोटो-फ्रीपिक)

7th Pay Commission, 7th CPC Latest News, Bihar Government Employees: बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन किया है। राज्य सरकार ने फोर्स रिटायरमेंट के लिए यग कमेटी बनाई है। यानी की अब बिहार के 50 साल से ज्यादा उम्र वाले सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को होशियार रहना होगा। अगर काम में ढिलाई हुई तो नीतीश सरकार की यह कमेटी जबरन रिटायर
की सिफारिश कर सकती है।

50 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए तैयारी इस पॉलिसी के तहत दो कमेटियों का गठन किया है, जिसमें एक कमेटी में तीन सदस्य और एक कमेटी में चार सदस्य हैं। इन कमेटियों की सिफारिश के आधार पर किसी भी 50 साल से ज्यादा उम्र के कामकाज में कमी पाए जाने पर उसे जबरन रिटायर किया जा सकेगा। हालांकि यह अभियान जून से शुरू होने जा रहा है।

बिहार सरकार ने एक खत जारी किया है। इस खत में जानकारी दी गई गई है कि समूह ‘क’ वाले अधिकारियों की कमेटी के अध्यक्ष गृह विभाग के अपर गृह सचिव होंगे।

इस कमेटी में अन्य तीन सदस्य और होंगे। वहीं दूसरी कमेटी ‘ख’ ग’ और और अवर्गीकृत कर्मचारियों के लिए बनाई गई है, इसके अध्यक्ष गृह विभाग के सचिव होंगे। हालांकि इस टीम में चार की बजाय दो ही सदस्य होंगे।

बिहार के इन सरकारी कर्मियों पर भी गिर सकती है गाज: इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने बीते बुधवार को फर्जी शिक्षकों के मामले में सख्ती दिखाई थी। कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों पर सख्त दिखाते हुए डिग्री जांच में किसी तरह की ढील ने दिए जाने की चेतावनी दी है। कोर्ट ने इसके साथ ही शिक्षकों से को सख्त चेतावनी दी है कि नहीं तो वेतन रुकवा दिया जाएगा।

कोर्ट ने कहा है कि जो शिक्षक सर्टिफिकेट जांच में कोताही बरतेंगे उनका वेतन फरवरी 2021 से रोक दिया जाएगा। कोर्ट ने फर्जी और अमान्य सर्टिफिकेट की निगरानी जांच में तेजी लाने के लिए कहा है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने रंजीत पंडित की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की थी।

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