अंशकालिक कर्मी नियमित किए जाने की मांग करने के हकदार नहीं- बोला SC; MP में 550 से अधिक को अनुकंपा पर नौकरी

7th Pay Commission: अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री कोविड-19 अनुकंपा नियुक्ति योजना में प्रदेश सरकार को अब तक 1,645 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 553 पात्र व्यक्तियों को नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

7th Pay Commission: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘अंशकालिक (पार्ट-टाइम) कर्मचा नियमित किये जाने की मांग करने के हकदार नहीं हैं क्योंकि वे किसी मंजूर पद पर काम नहीं कर रहे हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि नियमित करना सिर्फ नियमितीकरण नीति के मुताबिक किया जा सकता है, जैसा कि राज्य/सरकार द्वारा घोषित हो और कोई व्यक्ति नियमितीकरण को अधिकार के विषय के तौर पर दावा नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा, ‘‘किसी सरकारी संस्थान में पार्ट-टाइम अस्थायी कर्मचारी समान काम समान वेतन के सिद्धांत पर सरकार के नियमित कर्मचारियों के समान वेतन में समानता की मांग नहीं कर सकते।’’ न्यायालय ने केंद्र की एक एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह कहा, जिसके जरिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी।

इन कर्मियों के परिजनों को मिली नौकरीः मध्य प्रदेश में शासकीय सेवा में काम कर रहे परिवार के कमाऊ सदस्य की कोविड-19 से मौत होने के बाद प्रभावित परिवारों के कुल 553 लोगों को अब तक अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी गई है। जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार शाम को आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान 239 लाभार्थियों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने अब तक 553 व्यक्तियों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी है। इन व्यक्तियों के परिवार के कमाऊ सदस्य की कोविड-19 महामारी से मृत्यु हो गई थी और वे मध्य प्रदेश सरकार के कर्मचारी थे। उन्होंने बताया कि इन मृतक कर्मचारियों में अस्थाई पदों सहित विभिन्न क्षमताओं में कर्मचारी सेवा में थे।

अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री कोविड-19 अनुकंपा नियुक्ति योजना में प्रदेश सरकार को अब तक 1,645 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 553 पात्र व्यक्तियों को नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके 282 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में कुल 14.10 लाख रुपये (प्रत्येक बच्चे को पांच हजार रुपये) हस्तांतरित किए। यह वित्तीय सहायता मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के तहत दी गई। अधिकारी ने कहा कि सरकार इस योजना में ऐसे बच्चों की शिक्षा, भोजन और अन्य जरूरतें पूरी कर रही है।

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